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लखीमपुर के गणमान्य व्यवसाई एवं समाज सेवक बद्रीनारायण मालपानी का निधन

 


ओमप्रकाश तिवारी व राजेश राठी की रिपोर्ट

स्व मालपानी के जाने से लखीमपुर में फैली शोक की लहर

लखीमपुर। लखीमपुर के जाने-माने समाज सेवक एवं प्रसिद्ध व्यवसाई बद्रीनारायणजी मालपानी की पुण्य आत्मा ब्रह्म में वविलीन हो शांत हो गई । इनकी स्वर्गवासी होने की सूचना मिलने से लखीमपुर में शोक का माहौल व्याप्त है। बद्रीनारायण मालपानी की उम्र 82 वर्ष की थी। अपने पीछे उन्होंने अपनी धर्मपत्नी विमला देवी मालपानी सहित संयुक्त परिवार तीन बेटे अजय कुमार मालपानी, अनुराग मालपानी, अनुज मालपानी तथा तीन भाई रामगोपाल मालपानी, प्रमोद मालपानी और मनोज मालपानी, बेटी इंदु सोमानी तथा अलका सोमानी सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। स्व बद्रीनारायण मालपानी का व्यवसायिक प्रतिष्ठान लखीमपुर का प्रसिद्ध व्यवसायिक प्रतिष्ठान महेश्वरी हार्डवेयर है। स्वर्गीय मालपानी के सामाजिक सेवाओं में लखीमपुर में नन्हे-मुन्ने बच्चों के लिए गाय के शुद्ध दूध के उपलब्धता की व्यवस्था करवाना सर्वप्रचलित व सर्वोपरि है।उल्लेखनीय है कि आज से 25 वर्ष पहले लखीमपुर में नन्हे-मुन्ने नवजात बच्चों, बालको एवं बूढ़े बुजुर्गों के लिए शुद्ध दूध उचित मात्रा में उपलब्ध नहीं था। उस समय बद्रीनारायणजी मालपानी ने आम जनता के हित में गायों को पालना शुरू किया और 100% शुद्ध दूध इच्छुक लोगों को उनके बच्चे एवं बुजुर्गों के लिए उपलब्ध करवाया उनके द्वारा प्रारंभ किया गया यह सेवा आज भी प्रचलित है । आज भी उनके इस निजी गौशाला में लगभग ढाई सौ गायें हैं। विशेष उल्लेखनीय ऐतिहासिक बात इस 25 वर्ष पुराने निजी गौशाला की है कि इसमें जो गाय खरीद कर स्व बद्रीनारायण जी मालपानी लाते थे उस गाय के बच्चे या गाय को कभी भी बेचा नही जाता । वे गायें और उनके बच्चे अपने जीवन के अंतिम समय तक इसी गौशाला में रहते हैं उनके खानपान की व्यवस्था चिकित्सा और उनका अंतिम संस्कार भी विधिवत रूप से इनके द्वारा करवाया जाता है । भले इनके पास दूध देने वाली गाय 50 हो लेकिन एक समान आहार उन सभी ढाई सौ गायों को प्रतिदिन मिलता है । विशेष बात यह है कि इनके व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के रसोईधर में जब कार्यरत कर्मचारियों के लिए खाना बनता है तो सबसे पहले इन ढाई सौ गायों के लिए प्रतिदिन ढाई सौ रोटी बनाई जाती है और रोटी गुड़ का पहला अहार इन गायों को जाता है। गायों का आहार बनने के पश्चात ही इनके कर्मचारी गणों को भोजन दिया जाता है। इनके परिवार के सभी सदस्य भी गायों का आहार तैयार होकर उन तक पहुंचने के पश्चात हीं प्रतिदिन का पहला ग्रहण करते हैं।

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