दयानंद सिंह
मोरानहाट। जब से असम सरकार ने घाटे में चल रही असम चाय निगम के 15चाय बागानों को लीज पर देने की घोषणा की है, तब से उन बागानों के श्रमिकों मे भय,निराशा और शंका दिखाई दे रही है। असम चाय मजदूर संघ की केन्द्रीय समिति ने प्रभावित बागानों के श्रमिक नेताओं की एक समन्वय समिति गठित की थी। समिति की हाल में जोरहाट मे बैठक हुई थी जिसमें बागानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।समन्वय समिति के संयोजक घनश्याम बाढोई ने सभा को सूचित किया कि 15बागानों के श्रमिक-कर्मचारियों के वेतन बाकी है, समय पर राशन नहीं मिल रहा, भविष्य नीधि की राशि जमा नहीं किया गया है।बहुत से सेवानिवृत्त श्रमिकों की राशि नही मिली। असम मजदूर संघ की केंद्रीय समिति के सभापति पवन सिंह घाटवार कहा कि सरकार पहले श्रमिकों के बकाया राशि का भुगतान करे ,उनकी शंकाओं का निवारण हो, श्रमिकों के हितों की सुरक्षा के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी जाए और श्रमिक संगठनों को विश्वास मे लेकर आगे की कदम उठाए जाए। गत 27दिसंबर को 15बागानों के श्रमिकों ने बागान प्रबन्धकों के माध्यम से असम चाय निगम के बोर्ड डायरेक्टर को अपनी शंकाओं से संबंधित मांग पत्र भेजा।एक श्रमिक नेता ने कहा कि जब चाय की मांग बढ रही है, कीमत भी मिल रही है , उत्पादन संतोष जनक है तो घाटा की बात गले नहीं उतरती।कही प्रबंधन की भूल नीतियों का ठेकड़ा श्रमिकों के माथे क्यों फोड़ी जा रही है?अन्यथा सरकार अपना पिंड छुड़ा रही है।जरूर षड्यंत्र रचा जा रहा है।लेकिन मर रहा है श्रमिक।







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