दयानंद सिंह
मोरानहाट। असम के विकास में चाय उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है। लेकिन बड़ी चाय कम्पनियों के साथ साथ लघु चाय कृषकों का अवदान कम नहीं है।उपरी असम मे लघु चाय कृषि ने बहुत से वेरोजगार युवाओं को जीविकोपार्जन का पथ दिखाया तथा आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध हुई है।मोरान के नतून नगर स्थित कार्यालय में मोरान आंचलिक लघु चाय कृषक संस्था का एक दिवसीय नौवां त्रिवार्षिक अधिवेशन सम्पन्न हुआ। सुबह सफाई अभियान के बाद ध्वजारोहण किया सभापति दीनेश कुमार बेड़िया ने। स्मृति तर्पण उपसभापति सुभित क्षेत्री ने किया।इसके बाद गरीब लोगों के बीच वस्त्र और खाद्य सामग्री वितरित किया गया। दीनेश कुमार बेड़िया के सभापतित्व मे आयोजित प्रतिनिधि सभा में उद्देश्य व्याख्या सचिव होलीराम सुतिया ने किया।मुख्य अतिथि के आसन पर अखिल असम लघु चाय कृषक संस्था के महासचिव कल्याण दत्त और आमंत्रित अतिथि थे मोहनलाल उपध्याय।सभा में चाय कृषकों की समस्याओं विशेषकर हरी चाय पत्तियों की उचित कीमत न मिलने और सरकार की उदासीनता पर चर्चा की गई।इसी सभा में मोरान क्षेत्र के प्रकृति और जीव संरक्षक भरत बोरा का अभिनंदन किया गया।बोरा ने अपने घर के पास धनेश पक्षियों को बसेरा प्रदान किया है।







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