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धेमाजी के हाबुंग में आयोजित मे-डैम-मी-फी कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री






-राज्य सरकार आहोम की विरासत को बचाने के लिए प्रतिबद्ध : सीएम

धेमाजी (असम)। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा आज सांस्कृतिक मामलों के विभाग, असम सरकार और हाबुंग विकास प्रबंधन समिति द्वारा धेमाजी जिला के हाबुंग में केंद्रीय रूप से आयोजित आहोम समुदाय के प्रमुख पर्व मे-डैम-मी-फी कार्यक्रम में शामिल हुए। कार्यक्रम के आरंभ में मुख्यमंत्री ने पितरों के पूजा-अर्चना करने की रस्म में हिस्सा लिया। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा प्रदान की गई धनराशि से निर्मित हाबुंग चाओ-चेन-रेन और होलुंग हो-फी भवन का भी उद्घाटन किया।

डॉ. सरमा ने कहा, "भले ही मे-डाम-मे-फी एक आध्यात्मिक और पारंपरिक कार्यक्रम है, लेकिन इसका अधिक महत्व है। यह पूर्वजों और पिछली पीढ़ियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अवसर प्रदान करता है। पूर्वजों का आशीर्वाद वर्तमान पीढ़ी को आगे बढ़ने में मदद करता है। मैं अपनी पिछली पीढ़ियों के लिए असम के प्रत्येक नागरिक की भलाई के लिए प्रार्थना करता हूं।”

उन्होंने कहा, मे-डाम-मे-फी अब केवल आहोम समुदाय तक ही सीमित नहीं है। यह सार्वभौमिक हो गया है। उन्होंने घोषणा की है कि स्वर्गदेव सिउ-का-फा की दूसरी राजधानी ऐतिहासिक हाबुंग को आहोम शासन के अन्य महत्वपूर्ण स्थानों जैसे टीपम, चराईदेव आदि के साथ संरक्षित और विकसित किया जाएगा और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि असम और ताई आहोम का इतिहास अलग नहीं है और 600 साल के आहोम शासन के गौरवशाली अध्याय ने हर असमिया को हमेशा गौरवान्वित किया है। राज्य सरकार आहोम की विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस वर्ष लाचित बोरफुकन की 400वीं जयंती के उपलक्ष्य में राज्य सरकार नई दिल्ली और मुंबई में दो अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों का आयोजन करेगी और महान आहोम जनरल के जीवन और कार्यों पर अंग्रेजी और हिंदी में एक वृत्तचित्र बनाएगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जोरहाट में लाचित बोरफुकन की मैदाम विकसित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे और उन्होंने ऑल ताई अहोम स्टूडेंट्स यूनियन (एटीएएसयू) को इस उद्देश्य के लिए मैदाम के पास 50 बीघा जमीन की व्यवस्था करने में मदद करने का आह्वान किया। उन्होंने घोषणा की कि रंग घर को 100 बीघे के क्षेत्र में असम की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का केंद्र बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की जाएगी।

उन्होंने हाबुंग के विकास के लिए किए जाने वाले उपायों के बारे में भी बताया, जिसमें हो-फी भवन के पास पीडब्ल्यूडी द्वारा एक गेस्ट हाउस का निर्माण, विभिन्न जातीय समुदायों की परंपराओं, रीति-रिवाजों, व्यंजनों और परिधानों को प्रदर्शित करने के लिए हाबुंग में एक जातीय गांव की स्थापना शामिल है। उन्होंने एटीएएसयू से एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के सभागार और एक ताई आहोम संग्रहालय की स्थापना के लिए पहल करने का भी आह्वान किया। उन्होंने शिक्षा मंत्री और धेमाजी के विधायक डॉ. रनोज पेगू को भी हाबुंग को जोड़ने वाली सभी सड़कों के विकास के प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए घोषणा की कि हाबुंग चाओ-चेन-रेन मैदान की चारदीवारी और तोरण भी जल्द ही बनाया जाएगा।

आहोम समाज की मांग के अनुरूप मुख्यमंत्री ने 50 गांवों में चाओ-चेन-रेन बनाने के लिए 20-20 लाख रुपये देने की घोषणा की और कहा कि इन पूजा स्थलों का उद्घाटन मे-डाम-मे-फी के दिन अगले साल से एक साथ किया जाएगा। इसके बाद 50 और चाओ-चेन-रेन का निर्माण एक साल बाद किया जाएगा।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक मामलों के मंत्री बिमल बोरा, शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के मंत्री जोगेन मोहन, चाय जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री संजय किशन, विधायक प्रशांत फुकन और मानब डेका सहित अन्य सम्मानित व्यक्ति भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।

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