गुवाहाटी--प्रसिद्ध संस्कृत कलाकार, गीतकार, अनुवादक रंजन बेजबरुवा को इस वर्ष 'राष्ट्रीय संस्कृत गीतकार' से सम्मानित किया गया है। पुरी स्थित लोकभाषा प्रचार समिति, भारत के अध्यक्ष डॉ सदानंद दीक्षित, केंद्रीय मंत्री, संस्कृत वक्ता डॉ प्रताप चंद्र सारंगी, प्रधानमंत्री के विज्ञान सलाहकार डॉ ओम प्रकाश पांडे, आकाशवाणी दिल्ली केंद्र के संस्कृत प्रवाचक बल्लवानंद सागर प्रमुख ने रंजन बेजबरुवा को मनोनित करने पर बधाई दी है।गौरतलब है कि कलाकार रंजन बेजबरुवा ने भारतीय संगीत को संस्कृत भाषा के माध्यम से और संस्कृत के माध्यम से भारतीय संगीत को लोकप्रिय बनाने में बहुत प्रयास किये है। संस्कृत अनुवाद के माध्यम से भारतीय भाषा और संगीत का आदान-प्रदान बेजबरुवा के सांस्कृतिक कार्यों का मुख्य विषय है। उनके गीतों की पुस्तक 'गीत-संस्कृतम्' में मूल और संस्कृत अनुवादित गीत संकलित है, जिनमे आनंद-सुधाकर, भारतीय सांस्कृतिक निबंधों का संग्रह प्रमुख है। कलाकार रंजन बेजबरुवा के गीत विदेशों में भी लोकप्रिय हुए हैं। ऑडियो सीडी के अलावा, राष्ट्रीय मीडिया - आकाशवाणी, दूरदर्शन, और इंटरनेट के माध्यम से विदेशों में बड़ी संख्या में पसंद किया गया है।
15 अगस्त, 2017 को इकबाल के उल्लेखनीय देशभक्ति गीत 'सारे जहाँ से अच्छा' के संस्कृत संस्करण को राष्ट्रीय टेलीविजन 'डीडी न्यूज' (वार्तावली) पर प्रसारित किया गया था। आज यह देश के सबसे लोकप्रिय संस्कृत गीतों में से एक है।
ऐसे ही डॉ भूपेन हजारिका की विस्तीर्ण पारो रे, कवि रवींद्रनाथ टैगोर की 'एकला चलो रे', असम का प्रदेश गान 'ओ मोर आपोनार देश' अपने स्वयं के अनुवादों के साथ प्रस्तुत किया। एवं रफ़ी के जाहाॅ डाल डाल पर , ए अर रहमान की 'भारत हमको जान से प्यारा है’ तथा बापु के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो ’को भी गुणी अनुवादक- डाॅ हरेकृष्ण मेहेर, डाॅ चिरामनागपाल, और आलोक कुमार के संस्कृत भाषान्तरण में गाया है, जिन में सहयोग किये हैं प्रांजल बोरा, प्रणति वरुवा, कृष्णा दास और ऋतुराणी मौसुमी ने। 2017 में देश के दूसरे संस्कृत बैंड 'प्राच्या' के संस्थापक रंजन बेजबरुवा ने संस्कृत संगीत के प्रचार के माध्यम से बढ़ावा दिया है।
गौरतलब है कि 16 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कलाकार रंजन बेजबरूवा ने भारतीय विद्वानों की उपस्थिति में सोसायटी की असम शाखा के कार्यकारी अध्यक्ष कुशल कलिता द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय 'वेब समिट' में कुछ संस्कृत गीतों का प्रदर्शन किया था। इसके बाद ही इस सम्मान के लिए कलाकार बेजबरुवा को नामित करने का विचार शुरू हुआ।




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