तिनसुकिया (असम)। अरण्य मानव के रूप में विख्यात पद्मश्री यादव पायेंग का कहना है कि दो देशों के बीच युद्ध में सभी तरह पेड़ नष्ट हो सकते हैं लेकिन लाल चंदन के वृक्ष नष्ट नहीं होते हैं। उन्होंने यह दावा तिनसुकिया जिला के सदिया कॉलेज की पहल पर सदिया क्रिस्टी संघ के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान दिवस समारोह में हिस्सा लेते हुए कही। उन्होंने लोगों से लाल चंदन के पेड़ लगाने का आग्रह किया।
यादव पायेंग का कहना है कि यूक्रेन-रूस युद्ध में सभी पेड़ मर जाएंगे, लेकिन चंदन के पेड़ सुरक्षित रहेंगे। जादव " मोलाई " पायेंग पर्यावरणविद् और जोरहाट के वानिकी कार्यकर्ता हैं। उन्हें फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया के रूप में जाना जाता है। कई दशक तक उन्होंने ब्रह्मपुत्र नद के बीचों-बीच स्थित माजुली में खाली जमीन पर पेड़ लगाते हुए उन्हें जंगल में बदल दिया है। उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से केवल मिट्टी और कीचड़ से भरी जमीन को फिर से हरा-भरा कर दिया। उस जंगल का नाम अब मोलाई वन रखा गया है।




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