मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले को लेकर सोमवार को डेढ़ घंटे जिला जज की अदालत में बहस हुई। बहस में वक्फ बोर्ड व इंतजामिया कमेटी के अधिवक्ताओं ने दावे की कमियों को बताते हुए कहा कि दावा स्वीकार करने योग्य नहीं है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 22 मार्च दी है।
गौरतलब हो कि सन् 2020 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता रंजना अग्निहोत्री की ओर से पेश किए गए दावे को लेकर सोमवार जिला जज राजीव भारती की अदालत में दो प्रतिवादियों ने बहस की। इसमें कहा गया कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के साथ इंतजामिया कमेटी का समझौता हुआ और 1973 में यह समझौता डिक्री (न्यायिक निर्णय) हुआ। जब ट्रस्ट अब भी काम कर रहा है तो कोई भक्त बनकर ट्रस्ट के समझौते के खिलाफ कैसे जा सकता है।
प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ताओं ने बताया कि जो समझौता हुआ था, वह मालिकाना हक को लेकर नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि यह वाद निचली अदालत ने दायर नहीं किया तब प्रकीर्ण वाद को जिला जज की अदालत में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। इंतजामिया कमेटी शाही मस्जिद ईदगाह की ओर से सचिव तनवीर अहमद, नीरज शर्मा एडवोकेट, अबरार हुसैन और वक्फ बोर्ड की ओर से अधिवक्ता जीपी निगम ने बहस की।
सोमवार शाम सचिव तनवीर अहमद ने बताया कि अभी बहस बाकी है। अदालत में मौजूद वादी के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और पंकज वर्मा ने बताया कि अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 22 मार्च की तारीख तय की है।







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