गुवाहाटी। गुवाहाटी असम में विराजमान परम पूज्य गणिनी आर्यिका गुरु मां 105 विंध्यश्री माता जी ससंघ के सानिध्य में चल रहे श्री श्री 1008 अभिनव कल्पद्रुम महामंडल विधान के अंतर्गत गुरु मां ने बताया कि भक्ति रूपी गंगा में स्नान करने से कंस जैसा अधम पापी भी परमहंस बन जाता है । भक्ति करने से जीवन स्वर्ग बन जाता है। भगवान की भक्ति करने से जीवन आदर्शमय बन जाता है। आज हमें यहां पर जो कुछ दिखाई दे रहा है वह हमारे पूर्व कृत कर्मों के उदय से दिखाई दे रहा है। आज आपको थाली में 56 प्रकार के व्यंजन दिखाई दे रहे हैं तो आपने नियम से पूर्व जन्म में भगवान की अष्टद्रव्य से पूजन की होगी ।
आज आपके मकान में 10 कमरे दिखाई दे रहे हैं तो पूर्व जन्म में आपने नियम से किसी तीर्थ क्षेत्र में एक कमरा दान दिया होगा । आज आपके पास करोड़ों की संपत्ति दिखाई दे रही है तो आपने पूर्व जन्म में नियम से गुप्त दान दिया होगा। मंदिर जीर्णोद्धार में धन का सदुपयोग किया होगा इसीलिए आपको यहां पर सब कुछ दिखाई दे रहा है। भूत में पुण्य कार्य करने से वर्तमान में फल मिल रहा है और वर्तमान में प्रभु की भक्ति आराधना करने से भविष्य में जीवन सुखमय बन जाएगा।इ
कल शाम 6:15 बजे चक्रवर्ती की दिग्विजय जात्रा भगवान महावीर स्थल से नगर में भ्रमण करते हुए महावीर भवन तक बहुत धूमधाम से प्रभावना के साथ गुवाहाटी के इतिहास में प्रथम बार बहुत भव्यता से निकाली गई। जिन शासन की प्रभावना हेतु गुवाहाटी एवं आसपास की समाज ने एकत्रित होकर जुलूस की शोभा बढ़ाई । गुरु मां ने बताया कि चक्रवर्ती के हाथ से लिया गया दान तिजोरी में रखने से चक्रवर्ती जैसी संपदा प्राप्त होती है । जिस प्रकार चक्रवर्ती का खजाना कभी खाली नहीं होता उसी प्रकार हमारा धन-संपत्ति रूपी खजाना कभी खाली नहीं होगा नहीं। इस आशय की जानकारी प्रचार प्रसार समिति के संयोजक ओमप्रकाश सेठी व किशोर काला ने दी।












कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें