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सम्मेद शिखर बचाओ आंदोलन में गुवाहाटी जैन समाज का मुखर प्रतिवाद

 


गुवाहाटी। झारखंड के गिरिडीह जिले के पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित सम्मेद शिखर तीर्थ को बचाने के आंदोलन में आज गुवाहाटी सकल जैन समाज के लोगों ने मुखर प्रतिवाद करते हुए एक प्रतिवाद यात्रा निकाली। जिसमें हजारों की संख्या में जैन समुदाय के सभी घटकों के लोग उपस्थित थे।रैली की शुरूआत एमएस रोड स्थित महावीर स्थल से हुई। रेली जैसे ही फैंसी बाजार शनि मंदिर चौराहे पर पहुंची पुलिस प्रशासन ने उन्हें बाधा देकर वापस महावीर स्थल लौटने पर मजबूर कर दिया। फिर भी जैन समाज के लोगों में काफी आक्रोश देखा गया।रैली वापस महावीर स्थल में आकर समापन हुई जहां दिगंबर जैन पंचायत के अध्यक्ष महावीर जैन ने अपने संबोधन में सम्मेद शिखर तीर्थ को पूर्ण तीर्थ क्षेत्र घोषित कर पर्यटन क्षेत्र बनाने की अधिसूचना को वापस लेने की मांग को दोहराया। इस अवसर पर पार्षद प्रमोद स्वामी, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष मनीष सिंघी, दिसपुर जैन समाज के सचिव विनोद छाबड़ा जैन श्वेतांबर मंदिर मार्गी कि प्रेमचंद खजांची और जैन महिला समिति की सदस्या संतोष पाटोदी ने भी अपने संबोधन में सम्मेद शिखर तीर्थ क्षेत्र बचाओ अभियान में पूर्ण समर्थन से लगने की बात कही। इस कार्यक्रम का संचालन दिगंबर जैन पंचायत के सचिव विरेंद्र सरावगी ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन ताराचंद ठोलिया ने किया। इस अवसर पर दिगंबर जैन पंचायत के प्रचार समिति के मुख्य संयोजक ओमप्रकाश सेठी और संयोजक किशोर जैन ने बताया कि केंद्र सरकार ने सम्मेदशिखर को धार्मिक तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता दी है जबकि जैन समाज की मांग है कि इसे पूर्ण तीर्थ स्थल के रूप में मान्यता दी जाए। इसके पश्चात जैन समाज के सदस्यों ने असम के राज्यपाल प्रोफेसर जगदीश मुखी को एक स्मारक पत्र प्रदान किया। गौरतलब है कि सन 2019 में झारखंड में भाजपा शासित रघुवर सरकार ने पारसनाथ पहाड़ी व मधुबन क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र घोषित किया था। जिससे जैन समाज में आक्रोश की लहर फैल गई। पारसनाथ पहाड़ी पर दिगंबर जैन समाज का सम्मेद शिखर तीर्थ स्थल अवस्थित है। जैन समुदाय के प्रतिवाद को देखते हुए गुरुवार से केंद्र सरकार ने ईको टूरिज्म पर रोक लगा दी है। लेकिन यह इको सेंसेटिव जोन बना रहेगा। केंद्र सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 2 अगस्त 2019 को पारसनाथ पहाड़ी और मधुबन क्षेत्र को इको सेंसेटिव जोन तथा वन अभ्यारण अधिसूचित किया था। इसका मतलब ऐसा पर्यटन क्षेत्र जहां विदेशी पर्यटक भी आते हैं। जिसे जैन समाज ने स्वीकार नहीं किया। जैन समाज का मानना है कि पर्यटन क्षेत्र घोषित होने से यहां अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा मांस, मदिरा एवं अन्य अनैतिक कार्य शुरू हो जाएंगे। इस कार्य में केंद्र सरकार संज्ञान ले रही है लेकिन झारखंड राज्य सरकार की तरफ से अभी तक कोई प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।

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