30,000 करोड़ रुपये सरकारी ठेकेदारो का बकाया पर असम सरकार से स्पष्टीकरण मांगा
गंभीर वित्तीय संकट के बीच, असम में ठेकेदारों को 30,000 करोड़ रुपये का बकाया और विभिन्न वित्तीय संस्थानों से राज्य सरकार के लगातार ऋण उधार लेने के मध्यनजद, ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस (AIPC) की असम इकाई ने असम सरकार की वित्तीय स्थिरता पर गंभीर चिंता जताई है। राज्य कांग्रेस सचिव और एआईपीसी की राज्य इकाई के अध्यक्ष गौरव सोमानी ने कहा कि ऐसा लगता है कि असम सरकार का खजाना खाली है और राज्य सरकार दिवालिया होने के करीब है। सोमानी ने सरकार से पूछा कि राज्य सरकार के खजाने की वित्तीय स्थिति क्या है, इसे सार्वजनिक करे , और आगे कहा कि असम के खजाने में जो भी फंड है, वह राज्य की राजस्व आय का नहीं है, बल्कि वित्तीय संस्थानों जैसे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, वर्ल्ड बैंक, एशियाई विकास बैंक से ऋण है।
काम पूरा होने के बाद भी महीनों और वर्षों से बिलों का भुगतान न करने के कारण असम में विभिन्न ठेकेदारों की स्थिति आत्महत्या के कगार पर है। कई मामलों में तो ठेकेदारों द्वारा कोविड काल में किए गए कार्यों का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।
एआईपीसी ने विभिन्न आपूर्ति कार्यों और निर्माण अनुबंधों और भूमि अधिग्रहण के नाम पर भुगतान न करने वाले ठेकेदारों के बिलों का बकाया राशि के साथ आवंटित कुल धन की पूरी जानकारी मांगी है।
सोमानी ने आगे कहा कि उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization certificate) पिछले कुछ वर्षों से राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के 20,000 करोड़ रुपये से अधिक लंबित हैं। उपयोगिता प्रमाण पत्र अनुदानों के दुरुपयोग और धोखाधड़ी, यदि कोई हो, को बाहर करता है। लेकिन उपयोगिता प्रमाण पत्र के अभाव में यह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता है कि क्या प्राप्तकर्ताओं ने अनुदान का उपयोग उस उद्देश्य के लिए किया था जो उन्हें दिया गया था, और क्या संपत्ति बनाई गई थी।
सोमानी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार द्वारा वित्तीय रिपोर्टिंग में पूरी तरह गैर-पारदर्शिता है और सरकार के अधीन स्वायत्त परिषदों के संबंध में स्थिति और भी खराब है।







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