वैसे तो पूरे देश में रावण के पुतले का वध करने की परंपरा आश्विन मास के दशहरे के मौके पर निभाई जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के एक गांव में चैत्र मास के दशहरे पर भी रावण के पुतले की नाक काटने की अनोखी परंपरा है। (Ram Navami 2023) इस मौके पर गांव में 3 दिवसीय मेले का आयोजन भी किया जाता है। ये पंरपरा 100 साल से भी अधिक पुरानी बताई जाती है। इस आयोजन को देखने के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। आगे जानिए इस परंपरा से जुड़ी खास बातें.
मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में स्थित चिकलाना गांव (Chiklana village of Mandsaur) में रावण के पुतले की नाक काटने की परंपरा चैत्र मास के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि को निभाई जाती है यानी राम नवमी के अगले दिन। इस मौके पर 3 दिवसीय मेले का आयोजन होता है। राम नवमी की शाम को भजन किए जाते हैं और अगले दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद शाम को रावण की नाक काटने की परंपरा निभाई जाती है। एकादशी तिथि पर स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देते हैं।
एक ही पुतले की बार-बार काटते हैं नाक
चिकलाना गांव में रावण का पुतला बना हुआ है। हर साल इस आयोजन से पहले इसका रंग-रोगन किया जाता है और नई नाक लगा दी जाती है। चैत्र दशमी तिथि पर भाले से परंपरा अनुसार रावण की नाक काटकर उत्सव मनाया जाता है। खास बात ये है कि इस गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार भी इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। इस आयोजन को देखने के लिए आस-पास के 24 से अधिक गांवों के लोग जुटते हैं।
कैसे शुरू हुई ये परंपरा?
मध्य प्रदेश के इस छोटे से गांव चिकलाना में ये अनोखी परंपरा कैसे शुरू हुई, इसके बारे में कोई नहीं जानता, लेकिन गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि परंपरा लगभग 100 वर्षों से अधिक पुरानी है। स्थानीय लोगों के अनुसार, रावण में देवी सीता का हरण कर नारी जाति का अपमान किया था, इसलिए यहां हर साल रावण की नाक काटकर उसे अपमानित किया जाता है।








कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें