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मोरान में रूपकुंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की प्रतिमूर्ति का अनावरण हुआ




पवन मोर, मोरान

मारवाड़ी सम्मेलन मोरानहाट शाखा परिवार के प्रयासों से तथा समाजबंधु देवकीनंदन अग्रवाल के सौजन्य से मोरान के मिलीत शिल्पी समाज नाट्यमंदिर परिसर में एक समारोह में आऊंनीआटी सत्र के सत्राधिकारी परम आदरणीय महाप्रभु डॉ पीताम्बर देव गोस्वामी के कर कमलों से पहले रूपकुंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की प्रतिमा का लोकार्पण किया गया और दूसरे चरण में उसी परिसर में एक ठंडे पीने के पानी के वाटर कूलर मशीन का उद्घाटन किया गया।


भारी संख्या में उपस्थित मोरान इतर समाज बंधुओं मातृ शक्ति, अपने असमिया मारवाड़ी समाज के बंधुओं, मातृ शक्ति इत्यादि की उपस्थिति में सबसे पहले डॉ पीताम्बर देव गोस्वामी के कर कमलों से रूपकुंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की प्रतिमा का पर्दा हटाकर लोकार्पण किया गया और फिर दीप प्रज्वलित करते हुए, पुष्प अर्पित किए गए। इसके बाद अन्य सभी लोगों ने भी श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस प्रतिमा को हमारी मारवाड़ी सम्मेलन की मोरानहाट शाखा के प्रयासों से तथा समाजबंधु और सम्मेलन परिवार के साथी भाई देवकीनंदन अग्रवाल द्वारा अपने स्वर्गीय पिताजी मांगीलाल अग्रवाल की पावन स्मृति में लगवाया है।


दूसरे चरण में  नाट्य मंदिर प्रेक्षागृह में सम्मेलन परिवार के तत्वावधान में तथा देवकीनंदन अग्रवाल के सौजन्य से अपनी स्वर्गीय माताजी सीतादेवी अग्रवाल की स्मृति में लगवाई गई ठंडे पीने के पानी की मशीन वाटर कूलर का उद्घाटन आऊँनआटी सत्राधिकारी द्वारा किया गया।


तृतीय चरण में प्रेक्षागृह में मिलित शिल्पी समाज के नेतृत्व में आयोजित की गई सभा में सबसे पहले मिलीत शिल्पी समाज द्वारा प्रभु का, असम सरकार के कैबिनेट मंत्री जुगेन मोहन , पद्मश्री हेमप्रभा चूतिया का तथा दाता परिवार के वरिष्ठ सत्यनारायण अग्रवाल और देवकीननदन अग्रवाल का अभिनंदन किया गया।  फिर मारवाड़ी सम्मेलन मोरानहाट शाखा अध्यक्ष बिनोद अग्रवाल के नेतृत्व में पीतांबर देव का अभिनंदन किया गया। इसी कड़ी में सम्मेलन की डिब्रूगढ़ शाखा की तरफ से राजकुमार अग्रवाल और संदीप अग्रवाल ने, सम्मेलन की शिवसागर शाखा की तरफ से प्रदीप खेमका और रूपचन्द करनानी ने, महिला सम्मेलन की सदस्याओं ने, युवा मंच परिवार द्वारा तथा विभिन्न स्थानीय संस्थाओं, नामघर समिति इत्यादि ने पीताम्बरदेव गोस्वामी का अभिनंदन किया।


अपने संक्षिप्त संबोधन में जुगेन मोहन ने प्रभु का आभार व्यक्त करते हुए दाता परिवार को साधुवाद दिया तथा मारवाड़ी समाज के प्रति अपनी कृतज्ञता प्रगट की। आयोजन की महत्वपूर्ण कड़ी में मुख्य अतिथि महाप्रभु डॉ पीताम्बर देव गोस्वामी ने इस अवसर पर अपने भावों को व्यक्त करते हुए कहा कि विगत बहुत वर्षों से पहले स्वर्गीय मुंगिलालजी और उनके स्वर्गवास के बाद उनके पुत्र देवकीनंदन अग्रवाल की आऊनीआटी सत्र के प्रति अगाध श्रद्धा रही है और लगभग अपने सभी बड़े आयोजनों या शुभकार्यों में देवकीनंदन उनको आमंत्रित करते रहे हैं। और यही कारण है कि आज भी उनके आग्रह को वो अस्वीकार नहीं कर सके और इस आयोजन में उनको उपस्थित होना पड़ा है। उन्होंने देवकीनंदन के परिवार की इन सद्कार्यों हेतु भूरी भूरी प्रशंसा करते हुए आगे भी समाजसेवा या धार्मिक आस्था के क्षेत्र में उनको सक्रिय बने रहने का आह्वाहन किया।


उन्होंने अपने स्पंबोधन में असम में मारवाड़ी समाज के अवदान की सराहना करते हुए कहा कि मारवाड़ी लोग असम में आकर यहां के ही बन कर रह गए हैं। हां यह ठीक है कि वो ज्योतिप्रसाद अग्रवाल के समान यहां की संस्कृति या कला को आत्मसात नहीं कर पाए हैं जिसके चलते कभी कभी उनके खिलाफ आवाज उठती आई है। लेकिन फिर भी उनके योगदान, उनके समन्वय को हम नकार नहीं सकते हैं। असम विभिन्न जाति, वर्ण को मिलाकर गुंथी गई एक माला है जिसमें - कलिता, अहोम, ब्राह्मण, सोनोवाल, मोरान, मारवाड़ी, बंगाली इत्यादि रूपी फूल गूंथे गए हैं। हम इसमें किसी भी फूल के बिना इस माला की परिकल्पना नहीं कर सकते हैं। अतः मेरा आह्वाहन है कि हम असम के लोग आपस में प्यार से मिलजुलकर रहें और अन्य प्रदेशों से आए हुए लोग यहां को कला संस्कृति को बढ़ावा दें, अपनाएं तो फिर हम असम को लोग जो बहुत ही सरल स्वभाव के हैं - आपको अपनाने में कतई देर नहीं करते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण रूपकुंवर ज्योतिप्रसाद अग्रवाल हैं जिनको हम अपना आदर्श मानते हैं।


अंत में मिलीत शिल्पी समाज की तरफ से आभार व्यक्त करते हुए श्री हेम बोरा ने इस आयोजन में सहभागिता हेतु महाप्रभु का, जुगेन मोहन का, हेमप्रभा का, विभिन्न संस्थाओं का, उपस्थित समाज का आभार व्यक्त किया। उन्होंने दाता परिवार के देवकीनंदन अग्रवाल सहित पूरे परिवार को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि उनकी दानवीरता के चलते ज्योतिप्रसाद अग्रवाल की प्रतिमूर्ति स्थापना के सपने को हम साकार रूप दे पाए हैं।  और फाइनली उन्होंने मारवाड़ी सम्मेलन की मोरानहाट शाखा और पूरे मोरान मारवाड़ी समाज को इस सत कार्य हेतु धन्यवाद दिया तथा कहा कि हम मोरान में एक हैं और एक ही रहेंगे तथा भविष्य में भी हम साथ साथ कार्य करते रहेंगे। इसी के साथ आयोजन को विराम दिया गया।

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