निशा मूंधड़ा को मिला गणगौर की रानी का खिताब
मिट्टी की गणगौर वर्ग में मुस्कान एवं मेघा केड़िया एंड ग्रुप को प्रथम और काठ की गणगौर प्रतियोगिता में रश्मि बिहानी एंड ग्रुप रहा प्रथम
शिवसागर, देश भर के साथ ही शिवसागर में भी सौभाग्य प्राप्ति के उद्देश्य से की जाने वाली सोलह दिवसीय गणगौर पूजन के उत्सव का गणगौर की प्रतिमा के विसर्जन के साथ सफल समापन हुआ। शहर के थाना घाट स्थित दिखौ नदी के पक्का घाट पर दोपहर बाद से ही गणगौर विसर्जन के लिए महिलाओं और युवतियों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया था। पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सोलह श्रृंगार के साथ साजिदाजी सुहागिन महिलाओं और युवतियों ने श्रद्धापूर्वक गणगौर माता की पूजा अर्चना कर पारंपरिक मंगलगीत गाते हुए गणगौर को विदा किया। इस अवसर पर लगातार 7 वें साल बाबा रामदेव महिला समिति के सौजन्य से मिट्टी की गणगौर और काठ की गणगौर की सजावट प्रतियोगिता के साथ ही मुख्य आकर्षण के रूप में गणगौर की रानी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में क्रमशः काठ की गणगौर प्रतियोगिता में रश्मि बिहानी एंड ग्रुप को प्रथम, रेणु चांडक एंड ग्रुप को द्वितीय और गायत्री राठी एंड ग्रुप को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। वहीं मिट्टी की गणगौर प्रतियोगिता में मुस्कान एवं मेघा केड़िया एंड ग्रुप को प्रथम, रागिनी कामदार एंड ग्रुप को द्वितीय और कोमल छावछरिया एवं प्रगति अग्रवाल एंड ग्रुप को तृतीय पुरस्कार के लिए विजेता घोषित किया गया। इसी प्रकार निशा मूंधड़ा को गणगौर की रानी के खिताब से नवाजा गया। इस अवसर पर उपस्थित समाज की वरिष्ठ महिलाओं ने विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किये गए। समिति द्वारा हर साल की तरह विसर्जन स्थल पर जुटी मातृशक्ति की सुविधा के लिए शुद्ध पेयजल की सुंदर व्यवस्था की गई थी। उल्लेखनीय है कि गणगौर राजस्थान में आस्था प्रेम और पारिवारिक सौहार्द का सबसे बड़ा उत्सव है। गण अर्थात भगवान शिव तथा गौर अर्थात माँ पार्वती की आराधना के इस पर्व में कुँवारी लड़कियां मनपसंद वर पाने की कामना करती हैं। वहीं विवाहित महिलायें चैत्र शुक्ल पक्ष की तृतीया को गणगौर पूजन तथा व्रत कर अपने पति की दीर्घायु की कामना करती हैं। होलिका दहन के दूसरे दिन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया तक चलता है गणगौर का त्यौहार। चैत्र शुक्ल तृतीया को गणगौर माता की विदाई होती है। गणगौर की पूजा में गाये जाने वाले लोकगीत इस अनूठे पर्व की आत्मा हैं। गणगौर पूजन में कन्यायें और महिलायें अपने लिए अखंड सौभाग्य,अपने पीहर और ससुराल की समृद्धि तथा गणगौर से हर वर्ष फिर से आने का आग्रह करती हैं। यह भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का प्रतीक है, जो वैवाहिक सुख, अखंड सुहाग, समृद्धि और नारी शक्ति का उत्सव माना जाता है। होली के दूसरे दिन से शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया तक लगभग सोलह दिनों तक चलने वाला यह पर्व विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए, जबकि अविवाहित कन्याएं मनचाहा वर प्राप्ति के लिए व्रत, पूजा और लोकगीत-नृत्य करती हैं। परंपरागत रूप से महिलाएं मिट्टी की गण-गौर प्रतिमाएं बनाती या लाती हैं, उन्हें सजाती हैं, महावर-सिंदूर-चूड़ी चढ़ाती हैं, भोग लगाती हैं और लोकगीत गाकर "गोर गोर गोमती" जैसे छींटे मारती हैं। यह त्योहार नारी की भक्ति, प्रेम और पारिवारिक सौहार्द को दर्शाता है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में बाबा रामदेव महिला समिति की अध्यक्षा सीमा बरेलिया, सचिव यश्मी काबरा राठी, कंचन पारीक, प्रीति शर्मा, रेखा बाहेती, सुनीता सुरेका, सरिता मूंधड़ा, माला सिंघल, संगीता गुप्ता एवं बिनीता सिंघानिया ने सक्रिय भागीदारी निभाई।










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