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फिजाओं में घुल रही है गणगौर के पारंपरिक गीतों की स्वर लहरियां




शिलांग, कस्बे में इन दिनों गणगौर पर्व की धूम है। सुबह गणगौर ईसर के गीतों की स्वर लहरियां गूंज रही हैं। होली पर्व के समापन के साथ ही चैत्र कृष्ण पक्ष में पारंपरिक गणगौर पूजन का शुभारंभ हो गया है। सुहागिन महिलाएं एवं कुंवारी कन्याएं श्रद्धा एवं उत्साह के साथ पूजा अर्चना कर रही हैं। यह पर्व 15 दिन तक चलेगा। बालिकाएं सुबह फूल और दूब लेने जाते हुए देखी जाती हैं। कार्यक्रम में मारवाड़ी समाज की बालिकाएं महिलाएं सखी सहेली बढ़ चढकर भाग ले रहीं हैं। इस अवसर पर सभी एक जगह बैठकर गीत गाते हुए गणगौर महोत्सव को मना रही है गणगौर अवसर पर गणगौर माता को राजस्थानी रुप में झोपड़ी बनाकर सज्जित किया है। और प्रदेश में रहकर भी अपनी परम्पराओं को बहुत ही खुशियों के साथ मिलकर मनाती हैं गणगौर और इसर गौरा के गीत इन दिनों शहर में काफी चहल-पहल के साथ गुजं रहें हैं जो मारवाड़ी परम्परा की एक पहचान है।

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