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असम साहित्य सभा और कामरूप महानगर जिला साहित्य सभा के तत्वावधान में असम में पहली बार "भास्कराब्द सूचक दिवस" मनाया गया



गुवाहाटी, पश्चिम में बिहार से दक्षिण में उड़ीसा तक विस्तृत विशाल कामरूप राज्य के कामरूपाधिपति कुमार भास्कर वर्मन ने 593 ख्रीष्टाब्द के बाद अर्थात 600 ख्रीष्टाब्द में कामरूप के राज सिंहासन पर आरोहण किया था। ग्रेगरी बर्ष पंजी के अनुसार, नया वर्ष 15 अप्रैल अर्थात पहिला ब'हाग से आरंभ होता है। कुमार भास्कर वर्मन ने राजसिंहासन पर आरोहण करने वाले दिन को अर्थात 600 ख्रीष्टाब्द के पहिला ब'हाग (15 अप्रैल) की तारीख को पहला असमी सौर बर्षपंजी अर्थात भास्कराब्द के रूप में असम में प्रचलित किया गया।

इस वर्ष, असम में पहली बार असम साहित्य सभा और कामरूप महानगर जिला साहित्य सभा के संयुक्त उद्यम में 15 अप्रैल, बुधवार को एक दिवसीय कार्यक्रम के साथ असम साहित्य सभा के भगवती प्रसाद बरुआ भवन के संगीताचार्य लक्ष्मीराम बरुआ सदन में "1433 भास्कराब्दो लै आदरणि" और "भास्कराब्द सूचक दिवस" का आयोजन किया गया। उक्त दिन सुबह असम साहित्य सभा का झंडारोहन किया गया कामरूप महानगर जिला साहित्य सभा के सभापति प्रफुल्ल बर्मन द्वारा। इसके बाद कुमार भास्कर वर्मन के स्थिरचित्र पर दीप प्रज्वलन किया गया असम साहित्य सभा के पूर्व सभापति, पद्मश्री डॉ० सूर्यकांत हाजरिका द्वारा।


"चिर सेनेही मोर भाषा जननी" शीर्षक समवेत संगीत के साथ आरंभ की गई स्मृतिचारण सभा का संचालन किया गया कामरूप महानगर जिला साहित्य सभा के सभापति प्रफुल्ल बर्मन ने। जिला साहित्य सभा के संपादक अरुण कुमार महंत ने संचालन किया और उद्देश्य व्याख्या की। सभा में भाग लेते हुए पद्मश्री डॉ० सूर्यकांत हाजरिका ने कहा - "भास्कराब्द शब्द में स्वाभिमान है। जातीय संपद के रूप में गण्य किया जा सकता है। असमिया जाति की आयु रेखा भास्कराब्द है। कुमार भास्कर वर्मन पर गवेषणा होनी चाहिए।"


महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और विशिष्ट इतिहासकार डॉ० गजेंद्र अधिकारी ने मुख्य अतिथि के भाषण में कहा - "आज अधिकांश लोग भास्कराब्द में गलती करते हैं। ख्रीष्टाब्द में गलती नहीं होती। दैनंदिन या प्रशासनिक जीवन में भास्कराब्द व्यवहृत नहीं होता। असम साहित्य सभा ने भास्कराब्द दिवस उद्यापन करके एक मील का पत्थर स्थापित किया।"


असम साहित्य सभा के प्रधान संपादक देवजीत बोरा ने सभा में भाग लेते हुए भास्कराब्द दिवस उद्यापन की प्रासंगिकता, प्रत्येक असमी को भास्कराब्द जानने के दायित्व पर प्रकाश डाला। सभा में साहित्य सभा के पूर्व कोषाध्यक्ष मिहिर कुमार बरुआ, जिला साहित्य सभा के पूर्व उप-सभापति हरेश्वर डेका ने भी भाषण दिया। साहित्य सभा के गुवाहाटी कार्यालय के सचिव डॉ० संजीव कुमार शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह में 'कामरूप महानगर बार्ता' के संपादक और जिला साहित्य सभा के प्रचार आह्वायक दीपक शर्मा, पूर्व आरक्षी अधीक्षक निताई चंद्र घोष, साहित्य सभा के कवि सम्मेलन के आह्वायक नव राजन, तथ्य-प्रयुक्ति के आह्वायक स्वर्गज्योति चेतिया, पदुमी पाठक, पुतुली ठाकुरिया मेधि, गीतांजलि बर्मन आदि कई विशिष्ट व्यक्तियों ने भाग लिया।

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