लखीमपुर में कमल की प्रचंड लहर, 5 में 4 सीटों पर भाजपा का कब्जा; आंकड़ों की जुबानी चुनावी कहानी—कहीं ऐतिहासिक जीत, तो कहीं जमानत तक न बचा सके प्रत्याशी - Rise Plus

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लखीमपुर में कमल की प्रचंड लहर, 5 में 4 सीटों पर भाजपा का कब्जा; आंकड़ों की जुबानी चुनावी कहानी—कहीं ऐतिहासिक जीत, तो कहीं जमानत तक न बचा सके प्रत्याशी



लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट 

लखीमपुर, लखीमपुर की धरती पर इस बार लोकतंत्र का ऐसा महापर्व सजा, जिसने सियासत के हर रंग को एक साथ उजागर कर दिया—कहीं जीत का जश्न आसमान छूता नजर आया, तो कहीं हार इतनी करारी रही कि कई उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके। 8,45,476 मतदाताओं वाले इस जिले में 7,28,905 लोगों ने मतदान कर 86.21 प्रतिशत का ऐतिहासिक आंकड़ा छुआ, और इसी जनसैलाब ने यह तय कर दिया कि किसे सत्ता का ताज मिलेगा और कौन सियासी मैदान से लगभग बेदखल हो जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी ने चार सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया कि जिले में उसकी पकड़ बेहद मजबूत हो चुकी है, जबकि कांग्रेस को केवल एक सीट पर जीत के साथ संतोष करना पड़ा। लेकिन इन परिणामों की असली कहानी तब सामने आती है, जब हर सीट के आंकड़े और उम्मीदवारों की स्थिति को गौर से देखा जाए।


बिहपुरिया: भाजपा की जीत, छोटे उम्मीदवारों का पूरी तरह सफाया

73 नंबर बिहपुरिया सीट पर भाजपा के भूपेन बोरा ने 72,539 वोट हासिल कर कांग्रेस के नारायण भुइया (64,372 वोट) को 8,167 मतों से हराया। यह मुकाबला भले ही सीधा दिखा, लेकिन असली तस्वीर यह रही कि बाकी उम्मीदवारों को जनता ने पूरी तरह नकार दिया। VPI के डॉ. दिग्धांत गोगोई को मात्र 849 और निर्दलीय हेमन गोगोई को 520 वोट मिले—इतने कम कि उनकी जमानत जब्त होना तय है। 1,183 मतदाताओं ने NOTA दबाकर यह भी दिखा दिया कि वे विकल्पों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे।


रंगानदी: इतिहास रचा—पहला विधायक, लेकिन ज्यादातर उम्मीदवारों की जमानत जब्त

74 नंबर रंगानदी सीट इस चुनाव की सबसे चमकदार और ऐतिहासिक कहानी बन गई। यहां पहली बार विधायक चुना गया और भाजपा के ऋषिराज हजारिका ने 82,105 वोट अर्जित कर कांग्रेस प्रत्याशी जयंतो खाऊंड को 19461 वोटो से परास्त कर जीत का सहरा अपने मस्तक पर बांधने का गौरव हासिल किया। कांग्रेस के जयंता खाउंड को 62,644 वोट मिले, लेकिन बाकी उम्मीदवारों की स्थिति बेहद कमजोर रही। SUCI(C) के हेमकांत मीरी (302), AAP के टिकेंद्र थापा (587), RUC के जाकिर हुसैन (246), BGP के स्वपन पुद्दार (414), निर्दलीय कमल बरला (597) और अब्दुल गफूर (268)—इन सभी को इतने कम मत मिले कि उनकी जमानत जब्त होना तय है। केवल निर्दलीय पवन सउताल ने 11,825 वोट लेकर कुछ हद तक अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। 1,255 NOTA वोट यहां भी जनता की सोच का अलग आयाम दिखाते हैं।


नाऊबोसीया: कांग्रेस की राहत, छोटे दलों का अस्तित्व संकट में

75 नंबर नाऊबोसीया (SC) सीट पर कांग्रेस के डॉ. जयप्रकाश दास ने 86,537 वोट लेकर AGP के बसंतो दास (62,917 वोट) को 23,620 मतों से हराया। यह कांग्रेस के लिए राहत की एकमात्र खबर रही। लेकिन आम आदमी पार्टी के अच्युत दास (1,153) और VPI के विक्रम दास (1,174) इतने कम मतों पर सिमट गए कि उनकी जमानत जब्त होना तय है। 946 NOTA वोटों ने यहां भी यह संकेत दिया कि मतदाता हर विकल्प को आंख मूंदकर स्वीकार नहीं कर रहे।


लखीमपुर: मानव डेका की ऐतिहासिक जीत—रिकॉर्ड टूटा, विपक्ष बिखरा

76 नंबर लखीमपुर सीट पर भाजपा के मानव डेका ने जो जीत दर्ज की, वह सिर्फ एक जीत नहीं बल्कि एक राजनीतिक रिकॉर्ड बन गई। 84,277 वोट हासिल कर उन्होंने कांग्रेस के घनो बुरागुहाई (52,742 वोट) को 31,535 मतों से हराया और अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। इस प्रचंड जीत के आगे बाकी उम्मीदवार—SUCI(C) के बिरिंचि पेगू (512), RUC के नूरुल आलि (758) और निर्दलीय हेमंतो बरुआ (784)—पूरी तरह बौने नजर आए और उनकी जमानत जब्त होना तय है। 1,484 NOTA वोट यहां भी लोकतांत्रिक परिपक्वता का संकेत बने।


ढकुआखाना: 50 हजार से ज्यादा का अंतर—विपक्ष का पूर्ण सफाया

77 नंबर ढकुआखाना (ST) सीट पर भाजपा के नोवो कुमार डोले ने 92,123 वोट लेकर कांग्रेस के आनंद नोरोह (42,051 वोट) को 50,072 मतों के विशाल अंतर से हराया—जो पूरे जिले का सबसे बड़ा जीत का अंतर बना। SUCI(C) की जुटीका डोले को केवल 1,179 वोट मिले, जिससे उनकी जमानत जब्त होना तय है। 1,111 NOTA वोट यहां भी यह दर्शाते हैं कि जनता अब हर उम्मीदवार को परखकर ही फैसला कर रही है।

 जनता का साफ संदेश: अब नाम नहीं, काम चलेगा 

लखीमपुर के इन चुनाव परिणामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब चुनावी राजनीति में केवल नाम या पहचान से काम नहीं चलेगा। जिन उम्मीदवारों को हजार-दो हजार वोट भी नहीं मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई, वह इस बात का प्रमाण है कि जनता अब हर प्रत्याशी को कसौटी पर कस रही है।

भाजपा की प्रचंड जीत, रंगानदी में पहला विधायक, लखीमपुर में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन और ढकुआखाना में ऐतिहासिक अंतर—ये सभी मिलकर एक ही कहानी कहते हैं: लखीमपुर की जनता अब जागरूक है, निर्णायक है और अपने फैसलों से सियासत की दिशा तय करना जानती है।

यह चुनाव सिर्फ परिणाम नहीं, बल्कि एक संदेश है— जो जनता के दिल में जगह बनाएगा, वही सियासत में टिक पाएगा।

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