गुवाहाटी। महानगर के शताब्दी पुराने फैंसी बाज़ार स्थित "श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय" परिसर में कवि अमिताभ ठाकुरिया के हिंदी कविता संग्रह "कुछ खलिश कुछ खुशियाँ" का शुभ लोकार्पण किया गया।
इस अवसर पर आयोजित सभा का उद्घाटन करते हुए असम साहित्य सभा के पूर्व कोषाध्यक्ष किशोर कुमार जैन ने कहा— “असमिया भाषी हिंदी कवि-लेखकों की संख्या कम है। असमिया भाषा के श्रेष्ठ ग्रंथों का हिंदी में अनुवाद होना चाहिए। हिंदी एक सर्वभारतीय भाषा है। कविता में सृजनात्मक शक्ति होती है।”
हिंदी कविता संग्रह का लोकार्पण करते हुए ‘हिंदी सेंटिनल’ समाचार पत्र के पूर्व संपादक तथा कवि-अनुवादक दिनकर कुमार ने कहा— “किसी पुस्तक का प्रकाशित होना एक संतान के जन्म के समान है। कविता सृजन में मानसिक शांति मिलती है। रोज़ डायरी लिखनी चाहिए। अमिताभ ठाकुरिया की कविताएँ एक दिन विश्व मंच पर स्थान पाएंगी। कविता के माध्यम से समाज का निर्माण किया जा सकता है।”
कवि-शिल्पी पुष्पा सोनी द्वारा संचालित सभा में विशिष्ट अतिथि के रूप में बहुभाषी साहित्य मंच, असम के प्रधान संपादक तथा पत्रकार दीपक शर्मा ने कहा— “कवि और साहित्यकार का अंतर्मन स्वच्छ और निर्मल होना चाहिए। अंतर्मन पवित्र होने पर ही साहित्य का विकास होता है। मणिपुर में उत्पन्न समस्याओं के समाधान के लिए कवि-लेखकों को अपनी तेजस्वी लेखनी चलानी चाहिए।”
कार्यक्रम में शोधकर्ता-कवि राजीव हरि कौशिक, ब्रह्मपुत्र साहित्य सभा के पूर्व संपादक कांता अग्रवाला और संतोष वेद ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्यकारों को समाज में सद्भाव स्थापित करना चाहिए। उन्होंने दीपक शर्मा के वक्तव्य का पूर्ण समर्थन किया और अमिताभ ठाकुरिया के हिंदी कविता संग्रह के व्यापक प्रसार की आशा व्यक्त की।








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