संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित, समाज में चिंता का माहौल
लखीमपुर से राजेश राठी
कभी सेवा, संगठन और युवा नेतृत्व का प्रतीक रही मारवाड़ी युवा मंच, उत्तर लखीमपुर शाखा आज गंभीर नेतृत्व संकट से गुजर रही है। वर्ष 1982 में श्रद्धेय श्यामसुंदर सारड़ा के नेतृत्व में स्थापित इस शाखा ने पूर्वोत्तर सहित राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई थी, लेकिन वर्तमान में शाखा की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार सत्र 2026-27 प्रारंभ हुए एक माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद शाखा को नया अध्यक्ष नहीं मिल पाया है, जिसके कारण कई सामाजिक एवं संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। सत्र 2025-26 की अवधि समाप्त होने के बाद तत्कालीन अध्यक्ष मुकेश अग्रवाल ने पूरी कार्यकारिणी समिति को भंग कर दिया था। इसके बाद केवल एम्बुलेंस सेवा एवं शव वाहिनी सेवा को सीमित रूप में जारी रखा गया है।
सूत्रों के अनुसार शाखा द्वारा संचालित स्थायी शुद्ध पेयजल सेवा सहित कई महत्वपूर्ण सेवाओं की नियमित देखरेख को लेकर भी चिंता व्यक्त की जा रही है। शाखा वर्षों से रक्तदान शिविर, कैंसर जांच शिविर, ऑक्सीजन सिलेंडर सेवा, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, कैलीपर कैंप तथा कृत्रिम हाथ-पैर वितरण जैसे जनकल्याणकारी कार्यों के लिए जानी जाती रही है।
रुग्ण वाहिनी एवं शव वाहिनी सेवा के उत्कृष्ट संचालन के लिए शाखा को अखिल भारतीय मारवाड़ी युवा मंच द्वारा कई बार “सर्वश्रेष्ठ सेवा” सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। इसी शाखा से मंच के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र भट्टर सहित अनेक वरिष्ठ नेतृत्व उभरकर सामने आए हैं। वर्तमान पूर्वोत्तर प्रांतीय अध्यक्ष राज चौधरी भी इसी शाखा से जुड़े हुए हैं।
नए नेतृत्व के चयन के लिए आयोजित आमसभा में अपेक्षित संख्या में सदस्यों की उपस्थिति नहीं होने से भी संगठन की सक्रियता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वरिष्ठ मंचिष्ठों का मानना है कि यह केवल अध्यक्ष पद का संकट नहीं, बल्कि संगठनात्मक इच्छाशक्ति और युवा नेतृत्व का भी विषय बन चुका है।
समाज के प्रबुद्ध वर्ग ने वरिष्ठजनों, पूर्व पदाधिकारियों एवं युवा सदस्यों से मतभेद भुलाकर संगठन हित में एकजुट होने की अपील की है, ताकि उत्तर लखीमपुर शाखा को पुनः सक्रिय एवं सशक्त बनाया जा सके। फिलहाल समाज की निगाहें ऐसे नए नेतृत्व पर टिकी हैं, जो शाखा को फिर से सेवा और संगठन के उसी गौरवपूर्ण मार्ग पर आगे बढ़ा सके।








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