बोकाखात, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से थोड़ी दूर स्थित बोकाखात में 126 वर्षों की अस्था और विश्वास का प्रतीक श्री सत्यनारायण ठाकुरबाड़ी का पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ।
बता दें कि 1899 में राजस्थान के शेखावाटी मारवाड़ से असम पहुँचे मारवाड़ी परिवारों ने धनश्री नदी के तट पर नुमालीगढ़ में श्री सत्यनारायण ठाकुरबाड़ी बनाया था जो आगे चलकर थोड़ी दूर बोकाखात में भी बनाया गया। उसी मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य के पूरे होने पर बड़े ही धूमधाम से 29 अप्रैल से 3 मई तक प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव मनाया गया। मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के वैदिक आचार्यत्व के लिए सूरत (गुजरात) से पंडित विनोद चतुर्वेदी महाराज और उनके सहयोगी पंडित रामनरेश देबू पधारे थे। ठाकुरबाड़ी में तीन पीढ़़ियों से महंत की भूमिका निभाने वाले महंत परिवार के प्रमुख पंडित नेमीचंद शर्मा भी सीकर (राजस्थान) से पधारे थे।
29 अप्रैल 2026 को कलश यात्रा के साथ इस पांच दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ किया गया। कलश यात्रा जिसमें बड़ चढ़कर नारी शक्ति ने भाग लिया, जिसके बाद धर्म ध्वजा आरोहण के साथ प्राण प्रतिष्ठा विधि को प्रारंभ किया गया।
30 अप्रैल 2026, महोत्सव के दूसरे दिन मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से पूजा अर्चना हुई और शाम को मोरान से पधारे सुंदरकांड परिवार ने सुंदरकांड पाठ कर महोत्सव की गरिमा को और बढ़ा दिया।
1 मई 2026, महोत्सव के तीसरे दिन सुबह वास, धूपादिवास, घृताधीवास जैसे विशेष अनुष्ठान संपन्न हुए। इसके बाद शाम को श्री श्याम भजन संध्या का आयोजन हुआ जिसमें शिवसागर से पधारे श्री श्याम भक्त मंडल ने अपने भजनों से सभी भक्तों को खूब रिझाया।
2 मई 2026, महोत्सव के चौथे दिन देव विग्रहों की नगर परिक्रमा निकाली गई जिसमें जन सैलाब उमड़ पड़ा। गाजे-बाजे, ढोल नागाड़ों, रंगबिरंगी झांकियों के साथ नगर परिक्रमा निकाली गयी। नगर परिक्रमा का नेतृत्व एक सुसज्जित वाहन पर विराजे प्रबंध समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद अग्रवाला, विशिष्ट समाजसेवी झूमरमल चौधरी और राजेंद्र निमोदिया कर रहे थे। नगर परिक्रमा मंदिर परिसर से पूरे बोकाखात की परिक्रमा करते हुए नगर के एच. पी. पेट्रोल पम्प से घूमकर वापस मंदिर परिसर पहुंची।
3 मई 2026, महोत्सव के पांचवे और आखिरी दिन देव विग्रहों को मंदिर के गर्भ-गृह में स्थापित किया गया। मुख्य गर्भ-गृह में सत्यनारायण भगवान संग माता लक्ष्मी विराजमान हुई, दूसरे गर्भ-गृह में वीर राम भक्त हनुमान अपने बालाजी रूप में विराजमान हुए, भगवान शिव परिवार संग एक गर्भ-गृह में विराजमान हुए और साथ ही मंदिर में खाटू श्याम जी के विग्रह को भी स्थापित किया गया। प्राण प्रतिष्ठा होते ही मंदिर में जन सैलाब उमड़ा। पूर्णाहुति और विधि विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा पूजन का समापन हुआ। बाद में शाम को "शंखनाद" नामक स्मारिका का विमोचन किया गया जिसके बाद धार्मिक संस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें समाज के अधिक से अधिक लोगों ने बड़े उत्साह के साथ भाग लिया। कार्यक्रम के समापन में विशिष्ट समाजसेवियों और संस्थाओं का सम्मान किया गया।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष महावीर प्रसाद अग्रवाला, सचिव विनोद जालान और जीवन चौधरी, स्वागत समिति के अध्यक्ष अरुण चौधरी, कार्यकारी अध्यक्ष अशोक पटवारी एवं सचिव प्रभात निमोदिया ने सभी को पांच दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव को सफल बनाने के लिए आभार व्यक्त किया।








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