बोलेरो पिक-अप में 9 गौवंशीय पशु अमानवीय हालत में बरामद
कानून की नरमी से बढ़ रहे तस्करों के हौसले
लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट
लखीमपुर, असम में गौ तस्करी का अवैध कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। तस्कर खुलेआम कानूनों को धता बताते हुए निर्दोष गौवंशीय पशुओं को क्रूरतापूर्ण तरीके से वाहनों में ठूंसकर एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में लगे हुए हैं। ताजा घटना में आज प्रातः लगभग 2:13 बजे चाउलधौवा आउटपोस्ट पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के चलते एक संदिग्ध बोलेरो पिक-अप वाहन (AS21AC2383) को पकड़ने में सफलता मिली, जिसमें अमानवीय परिस्थितियों में 9 गौवंशीय पशुओं को ले जाया जा रहा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार चाउलधोवा आउटपोस्ट के प्रभारी अधिकारी ने आउटपोस्ट के समीप संदिग्ध अवस्था में उक्त वाहन को रोकने का प्रयास किया, किंतु पुलिस दल को देखते ही चालक वाहन को तेज गति से भगाकर फरार होने लगा। इसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वाहन का पीछा किया और परघाट के निकट उसे रोकने में सफलता प्राप्त की। हालांकि वाहन चालक ने वाहन को सड़क किनारे छोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस की मुस्तैदी के कारण उसे धर दबोचा गया और वाहन सहित चाउलधोवा आउटपोस्ट लाया गया। वाहन की तलाशी लेने पर जो दृश्य सामने आया उसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। वाहन में कुल 9 गौवंशीय पशु अत्यंत दयनीय, घायल और अमानवीय अवस्था में पाए गए। तस्करों ने पशुओं के सिर और पैर लाल प्याज की बोरियों तथा रस्सियों से इतनी बेरहमी से कसकर बांध रखे थे कि उनके शरीर पर गंभीर चोटों के स्पष्ट निशान दिखाई दे रहे थे। जिस प्रकार इन मूक पशुओं को वाहन में ठूंस-ठूंसकर ले जाया जा रहा था, वह सीधे तौर पर पशु संरक्षण एवं परिवहन संबंधी नियमों तथा Animal Cruelty Act की भावना का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। नियमों के अनुसार पशुओं के परिवहन में पर्याप्त स्थान, लदे गए वाहन का कैटल परमिट, भोजन-पानी, सुरक्षा तथा मानवीय व्यवहार सुनिश्चित करना अनिवार्य होता है, किंतु गौ तस्कर लाभ के लालच में सभी नियमों को ताक पर रखकर बेजुबान पशुओं पर अत्याचार करने से भी नहीं हिचकिचाते। गिरफ्तार आरोपी की पहचान सद्दाम हुसैन (28 वर्ष), पिता अब्दुल हुसैन, निवासी बरमा बिल, थाना समागुड़ी, जिला नगांव, असम के रूप में हुई है। इधर, क्षेत्र में यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि पुलिस द्वारा तस्करों को पकड़कर अदालत में पेश किए जाने के बावजूद कानूनी प्रक्रिया के तहत कई मामलों में जब्त पशु पुनः उन्हीं लोगों के कब्जे तक पहुंच जाते हैं, जिससे गौ तस्करों के हौसले दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। सामाजिक संगठनों एवं पशु प्रेमियों का कहना है कि यदि गौ तस्करी और पशु क्रूरता पर कठोर एवं स्थायी कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे अवैध नेटवर्क और अधिक मजबूत होते जाएंगे, जिससे कानून का भय समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है।








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