डिब्रूगढ़ से संदीप अग्रवाल।
पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर समाजसेवी प्रभुदयाल बेरीवाल एवं बेरीवाल परिवार के सौजन्य से ज्योति नगर स्थित “कृष्णा निवास” में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ का अंतिम दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं के बीच संपन्न हुआ। 9 जून से 15 जून तक प्रतिदिन आयोजित इस कथा में हरिद्वार से पधारे राष्ट्रीय संत नवराज प्रपन्न जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान कराया।
सप्तम एवं अंतिम दिवस पर कथाव्यास ने उद्धवजी की व्रज यात्रा, श्री सुदामा चरित्र, शुकदेव जी की विदाई और कथा विश्राम जैसे मार्मिक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता निस्वार्थ प्रेम, समर्पण और अटूट विश्वास का अनुपम उदाहरण है। निर्धन ब्राह्मण सुदामा द्वारा प्रेमपूर्वक लाए गए मुट्ठीभर चावलों को भगवान श्रीकृष्ण ने अत्यंत स्नेह से स्वीकार किया और बिना कुछ मांगे ही अपने मित्र की समस्त दरिद्रता दूर कर दी।
कथाव्यास ने शुकदेव जी की विदाई प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन क्षणभंगुर है तथा मनुष्य को मोह-माया का त्याग कर ईश्वर भक्ति और सद्कर्मों का मार्ग अपनाना चाहिए। सात दिनों तक राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाने के उपरांत शुकदेव जी का अंतर्ध्यान होना वैराग्य, ज्ञान और भक्ति का अद्वितीय संदेश देता है।
कथा के समापन अवसर पर प्रस्तुत कृष्ण-सुदामा मिलन की सजीव झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और भावनाओं का अद्भुत वातावरण देखने को मिला।
इस अवसर पर नवराज प्रपन्न जी महाराज ने प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुओं और सेवाभावियों के प्रति आभार व्यक्त किया। वहीं आयोजक परिवार की ओर से जयप्रकाश बेरीवाल एवं राजेश बेरीवाल ने सप्ताहव्यापी आयोजन को सफल बनाने में सहयोग देने वाले समस्त धर्मप्रेमी महानुभावों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यक्रम का समापन 16 जून, मंगलवार को हवन, पूर्णाहुति एवं महाप्रसाद के साथ संपन्न हुआ।







कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें