'तेजस्विता' महिला सम्मेलन का समापन सत्र असमिया संस्कृति से ओतप्रोत हुआ
गुवाहाटी। पुर्वोतर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के सौजन्य से मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा गुवाहाटी के अतिथ्य में आयोजित दो दिवसीय तेजस्विता महिला सम्मेलन का समापन सत्र असमिया संस्कृति से ओतप्रोत रहा। सम्मेलन की 20 महिला शाखाओ की 300 से अधिक सदस्याओ ने असमिया जातीय परिधान मेखला चादर पहनकर एवं असमिया जातीय नृत्य बिहू नृत्य करके अधिवेशन को असमिया संस्कृति के रंग में रंग दिया। समापन सत्र की शुरुआत असमिया जातीय गीत ओ मोर आपुनार देश से हुई। अधिवेशन में उपस्थित विशिष्ट अतिथि भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डा जूरी शर्मा बरदोलोई ने असमिया संस्कृति की माहौल को देखते हुए कहा कि जिस सत्र की शुरुआत असमिया जातीय गीत से हुआ वह सत्र असम प्रेमी मारवाड़ी महिलाओं द्वारा आयोजित किया गया है। इससे यह साबित होता है कि आप सभी मारवाड़ी इंडीजीनस आसामीज है। पूर्व सांसद क्वीन ओझा ने भी मारवाड़ी महिलाओं के असम के प्रति लगाव और समर्पण की सराहना की। इससे पहले नारी शक्ति, सम्मान, स्वावलंबन और सशक्तिकरण का संदेश देते समापन सूत्र की शुरुआत की गई। अधिवेशन के दूसरे दिन महिला जागरूकता, नेतृत्व, आत्मनिर्भरता और व्यक्तित्व विकास से जुड़े विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।
समापन समारोह में पूर्व सांसद क्वीन ओझा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष जूरी शर्मा बोरदोलोई एवं सीए रागिनी गोयल विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कार्यक्रम में प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा, मंडलीय उपाध्यक्ष सुशील गोयल, वयोवृद्ध समाजसेवी शंकरलाल गोयनका, शाखा अध्यक्ष संतोष शर्मा, मंत्री मंजू भंसाली, स्वागत अध्यक्ष सरोज मित्तल तथा स्वागत मंत्री सरला काबरा सहित अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधि उपस्थित थीं। समापन समारोह को संबोधित करते हुए मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी महिला शाखा की अध्यक्ष संतोष शर्मा ने कहा कि आने वाले समय में ‘तेजस्विता’ अधिवेशन महिलाओं की प्रतिभा, शक्ति और आत्मविश्वास को नई पहचान देने के साथ समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगा। उन्होंने कहा कि मारवाड़ी सम्मेलन के 91 वर्ष के इतिहास में गुवाहाटी महिला शाखा द्वारा ‘तेजस्विता’ की जो नींव रखी गई है, वह आने वाले समय में एक वटवृक्ष का रूप लेकर समाज की महिलाओं को नई दिशा और नई प्रेरणा देगी।
इस मौके पर प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा ने कहा कि “‘तेजस्विता’ का आज समापन नहीं हुआ है, बल्कि यह मारवाड़ी सम्मेलन में एक आंदोलन के रूप में शुरू हुआ है।” उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की ज्योति को कभी बुझने नहीं देना चाहिए, बल्कि इसे निरंतर प्रज्वलित रखते हुए समाज की अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुंचाना चाहिए।
मुख्य अतिथि एवं पूर्व सांसद क्वीन ओझा ने कहा, “मैं कनकलता कहूं या झांसी की रानी—नारी शक्ति और साहस की पहचान हर रूप में हमारे सामने है।” उन्होंने कहा कि अधिवेशन का माहौल ऐसा प्रतीत हो रहा है, मानो पूरा परिसर एक ‘मिनी असम’ बन गया हो। उन्होंने कहा कि असम के सुख-दुख में मारवाड़ी समाज हमेशा मजबूती से खड़ा रहा है और बाढ़ जैसी आपदाओं के समय भी समाज सेवा एवं राहत कार्यों में मारवाड़ी समाज की सक्रिय भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि आज असम में रह रहा मारवाड़ी समाज 100 प्रतिशत असमिया हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम पहले भारतीय हैं, फिर असमिया हैं और राजनीति बाद में, समाज सेवा पहले होनी चाहिए।”
भाजपा प्रदेश महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष जूरी शर्मा बोरदोलोई ने कहा, “हर मारवाड़ी इंडिजिनियस असमिया है और असम के विकास एवं सामाजिक जीवन में मारवाड़ी समाज का योगदान किसी भी दृष्टि से कम नहीं है।” उन्होंने कहा कि असम की संस्कृति और समाज के साथ मारवाड़ी समुदाय का जुड़ाव लंबे समय से रहा है और इस योगदान को गर्व के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
सीए रागिनी गोयल ने महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि प्रत्येक महिला को अपनी प्रतिभा और कौशल को पहचानकर उसे अपनी ताकत बनाना चाहिए।
मंडलीय उपाध्यक्ष सुशील गोयल ने ‘तेजस्विता’ के सफल आयोजन के लिए मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी महिला शाखा को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि महिला शाखा के पदाधिकारियों एवं सदस्यों के अथक प्रयासों, समर्पण और टीम भावना के कारण ‘तेजस्विता’ एक सफल एवं प्रभावशाली आयोजन के रूप में सामने आया। इस दौरान शिलांग से आई पुष्पा बजाज ने महिलाओं के मासिक धर्म के दौरान उपयोग होने वाले रीयूजेबल नैपकिन पैड घर पर ही तैयार करने की अहम जानकारी दी।
इससे पूर्व शनिवार की शाम अधिवेशन में महिला कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय महिला कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नारी शक्ति, संवेदना और सामाजिक सरोकारों को अभिव्यक्ति दी। इसी अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपने उल्लेखनीय कार्यों से अलग पहचान बनाने वाली 13 विशिष्ट महिलाओं को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाली महिलाओं में उर्मिला दिनोदिया (लखीमपुर), बिनीता चौधरी गाडोदिया, पायल अग्रवाल (शिवसागर), सुंदरी देवी पटवा (सिलचर), प्रेम जसरासरिया (शिलांग), मंजू दूगड़ (बोंगाईगांव), पुष्पा देवी अग्रवाल (तिनसुकिया), संतोष शर्मा (बिजनी), मधु तातेड़ (सिलापाथर), ऋतु लोहिया (डिब्रूगढ़), प्रमिला देवी भीमसरिया (होजाई), नीतू पोद्दार (नगांव) तथा सीता हरलालका (बरपेटा) शामिल रहीं। इन महिलाओं के अपने-अपने क्षेत्रों में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और सामाजिक योगदान की सराहना की गई।
वहीं रविवार सुबह महिलाओं के लिए विशेष योग शिविर का आयोजन भी किया गया। शिविर में महिला प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। योग के माध्यम से शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और सकारात्मक जीवनशैली के महत्व पर जोर दिया गया। इस पहल ने अधिवेशन के महिला सशक्तिकरण के व्यापक उद्देश्य को स्वस्थ और संतुलित जीवन के संदेश से जोड़ा।
दो दिवसीय ‘तेजस्विता’ अधिवेशन के दौरान महिला सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता, नेतृत्व, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक जागरूकता एवं व्यक्तित्व विकास सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
स्वागत मंत्री सरला काबरा ने धन्यवाद देते हुए कहा कि ‘तेजस्विता’ को सफल बनाने में पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के पदाधिकारियों, गुवाहाटी स्थित सम्मेलन की सभी शाखाओं तथा अन्य शाखाओं का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। उन्होंने अधिवेशन के आयोजन में प्रत्यक्ष एवं प्रमुख रूप से सहयोग देने वाले सभी पदाधिकारियों, अतिथियों, सहयोगियों एवं प्रतिनिधियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। वहीं श्रीमती संतोष शर्मा ने आयोजन को सफल बनाने के लिए विशेष रूप से गुवाहाटी महिला शाखा की सभी सलाहकारों, कार्यकारिणी सदस्यों एवं साधारण सदस्याओं के प्रति आभार व्यक्त किया, जिनके अथक प्रयासों से अधिवेशन का शानदार समापन हुआ। समापन समारोह में असमिया पारंपरिक परिधान की झलक ने पूरे आयोजन को विशेष और यादगार बना दिया।







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