कहानियों के रंग में रंगा श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय का सभागार - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

कहानियों के रंग में रंगा श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय का सभागार

 



आठ कहानीकारों ने प्रस्तुत कीं विविध कथाएँ, दिनकर कुमार ने की कहानियों के शिल्प एवं कथ्य की सारगर्भित समीक्षा


गुवाहाटी। श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय के कमला पोद्दार सभागार में रविवार को आयोजित ‘कहानी वाचन’ कार्यक्रम कहानी-कला की जीवंत कार्यशाला बन गया। मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार दिनकर कुमार के सान्निध्य में आयोजित यह कार्यक्रम महज कहानी सुनने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कहानी के शिल्प, कथ्य, भाषा और प्रस्तुति को समझने का सशक्त माध्यम बना।


कार्यक्रम में आठ कहानीकारों ने अपनी-अपनी कहानियों का पाठ किया। प्रत्येक कहानी के वाचन के बाद मुख्य अतिथि दिनकर कुमार ने उसकी समीक्षा करते हुए कथ्य, पात्र, भाषा और प्रस्तुति के विभिन्न पक्षों पर सारगर्भित चर्चा की। उन्होंने श्रोताओं को महान साहित्यकारों एवं कलाकारों की कहानी कहने और लिखने की विशिष्ट शैलियों से भी परिचित कराया।


कहानी वाचन का शुभारंभ कंचन शर्मा की कहानी ‘अपना घर’ से हुआ। कहानी में वृद्धावस्था में माता-पिता की उपेक्षा और उससे उत्पन्न पारिवारिक त्रासदी को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। सुरेंद्र सिंह ने अपने व्यंग्यात्मक अंदाज में ‘कटघरे में भगवान’ कहानी सुनाई, जिसमें देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की दुर्दशा के माध्यम से सामाजिक विडंबनाओं पर तीखा प्रहार किया गया।


पुस्तकालय के अध्यक्ष विनोद रिंगानिया ने ‘रात की ट्रेन’ कहानी के माध्यम से मनुष्य के जीवन में विश्वास और अंधविश्वास के बीच के द्वंद्व को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। हेमलता गोल्छा की ‘उस पार’ मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखने वाली मार्मिक कहानी रही। अंजना जैन ने बर्तनों के दृष्टिकोण से मानव जीवन और पारिवारिक संबंधों को चित्रित करती हास्य कथा ‘चार बर्तन’ प्रस्तुत की।


किशोर कुमार जैन ने ‘माया’ कहानी के माध्यम से गरीब लड़की पाही के जीवन-संघर्ष को प्रभावी ढंग से सामने रखा और कहानी का सुखद अंत श्रोताओं को विशेष रूप से प्रभावित कर गया। सौमित्रम जी ने उग्रवाद के प्रभाव को केंद्र में रखते हुए ‘समझौता’ कहानी प्रस्तुत की, जबकि संतोष बैद ने दांपत्य जीवन पर आधारित मार्मिक कहानी ‘मॉर्निंग वॉक’ का पाठ किया।


आठों कहानियों की विषय-वस्तु भले ही अलग-अलग रही, लेकिन प्रत्येक कहानी में समाज, संबंधों, मानवीय संवेदनाओं और जीवन के किसी न किसी महत्वपूर्ण पहलू को अभिव्यक्ति मिली। विषयों की यही विविधता कार्यक्रम को विशेष रूप से रोचक और सार्थक बनाती रही।


कार्यक्रम ने कहानी वाचन को केवल मनोरंजन का माध्यम न बनाकर कहानी को समझने, उसके शिल्प को पहचानने और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक उपयोगी पहल का रूप लिया।


इस अवसर पर डॉ. प्रदीप कुमार जैन सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं श्रोता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संयोजन किशोर कुमार जैन ने किया। अंत में पुस्तकालय की सचिव कांता अग्रवाल ने सभी अतिथियों, कहानीकारों, समीक्षकों एवं श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें