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श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय में तुलसी जयंती पर हुआ सार्थक विमर्श



गुवाहाटी, श्री मारवाड़ी हिंदी पुस्तकालय में तुलसी जयंती के अवसर पर गोस्वामी तुलसीदास के व्यक्तित्व, कृतित्व और साहित्यिक अवदान पर सार्थक एवं विचारोत्तेजक विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता ओंकार केड़िया ने “तुलसी भक्त बड़े थे या कवि?” विषय पर विचार रखते हुए तुलसीदास के राम के प्रति भक्ति-भाव और उनके साहित्यिक व्यक्तित्व को विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि तुलसीदास केवल भक्त या केवल कवि नहीं, बल्कि ऐसे भक्त-कवि थे, जिनकी भक्ति और काव्य-प्रतिभा एक-दूसरे में विलीन होकर अद्भुत साहित्य का सृजन करती है।


विशिष्ट वक्ता अंशु सारडा ने तुलसीदास के काव्य-सौंदर्य और सृजन-कौशल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने विभिन्न पात्रों और प्रसंगों को अनेक रसों के माध्यम से इस प्रकार जीवंत किया कि वे पाठकों के सामने साकार हो उठते हैं। उनके चरित्र-चित्रण में भाव, संवेदना और कलात्मकता का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पुस्तकालय अध्यक्ष विनोद रिंगानिया ने कहा कि राम के चरित्र की व्याख्या अनेक कवियों ने की, लेकिन तुलसीदास का स्थान विशिष्ट है। उन्होंने राम को सहज और सरल भाषा में जन-जन तक पहुँचाया और उन्हें केवल आदर्श चरित्र ही नहीं, बल्कि जनमानस के आराध्य के रूप में स्थापित किया। वे वास्तव में जन-जन के कवि थे।


सचिव कांता अग्रवाल ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए ऐसे साहित्यिक आयोजनों की प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए। गायिका सोनाली बिरला ने तुलसीदास रचित भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति से वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर माधव कंदलि द्वारा असमिया में रचित रामायण पर भी चर्चा हुई।


कार्यक्रम के सफल आयोजन में सह-सचिव लक्ष्मीपत जी बैद का विशेष सहयोग रहा। इस अवसर पर सुधा श्रीवास्तव, नारायण खाकोलिया, राजकुमार तिवारी, सुरेश गर्ग सहित पुस्तकालय के अनेक पदाधिकारी, साहित्यप्रेमी एवं बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।

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