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लखीमपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत में 7,234 मामले प्रस्तुत

 


एक दिन में 758 मामलों का समाधान, 4.23 करोड़ रुपये से अधिक की राशि से जुड़े विवाद निपटे


लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवाड़ी की संयुक्त रिपोर्ट


लखीमपुर, न्याय के लिए वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने की मजबूरी के बीच लोक अदालत ने एक बार फिर त्वरित और सुलभ न्याय की अपनी उपयोगिता साबित की है। लखीमपुर जिले में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में एक ही दिन में 758 मामलों का निपटारा किया गया। लोक अदालत में कुल 7,234 मामले निपटारे के लिए प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 758 मामलों का पक्षकारों की आपसी सहमति और समझौते के आधार पर समाधान हुआ। निपटाए गए मामलों से संबंधित कुल 4,23,72,165 रुपये की राशि का निपटारा किया गया।


राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के निर्देशानुसार तथा असम राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखीमपुर के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य आम नागरिकों को सरल, त्वरित, सुलभ और कम खर्च में न्याय उपलब्ध कराना रहा। लोक अदालत में लंबित मामलों के साथ-साथ प्री-लिटिगेशन स्तर के समझौतायोग्य विवादों को भी समाधान के लिए लिया गया।


लोक अदालत में विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई एवं निपटारा किया गया। इनमें बैंक ऋण संबंधी विवाद, चेक बाउंस के मामले, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति प्रकरण, वैवाहिक एवं पारिवारिक विवाद, बिजली एवं अन्य सेवाओं से जुड़े विवाद सहित विभिन्न समझौतायोग्य मामले शामिल रहे। पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बजाय आपसी सहमति, समझ-बूझ और समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त करने का अवसर मिला। इससे न केवल समय और धन की बचत हुई, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे कई विवादों को भी सौहार्दपूर्ण तरीके से समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।


लोक अदालत को वैकल्पिक विवाद समाधान का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इसके माध्यम से समझौतायोग्य मामलों का शीघ्र निपटारा होने से न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या और न्यायिक व्यवस्था पर पड़ने वाले बोझ को कम करने में भी सहायता मिलती है। लोक अदालत की प्रक्रिया में पक्षकारों के बीच सहमति को प्राथमिकता दी जाती है, जिससे विवादों का समाधान टकराव के बजाय आपसी समझ और सौहार्द के वातावरण में संभव होता है।


राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखीमपुर की ओर से पूर्व में विभिन्न माध्यमों से व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाया गया था। आम लोगों को लोक अदालत की प्रक्रिया, इसके लाभ और समझौतायोग्य मामलों के शीघ्र समाधान की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी गई। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने नागरिकों से अपील की कि वे अपने समझौतायोग्य विवादों के समाधान के लिए लोक अदालत का अधिक से अधिक लाभ उठाएं तथा आवश्यकता पड़ने पर प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता का भी उपयोग करें।


जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखीमपुर की सचिव साबिना यास्मिन ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंकों एवं अन्य संस्थानों के प्रतिनिधियों, सरकारी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों, पैनल अधिवक्ताओं, पैरा-लीगल वॉलंटियर्स तथा अन्य संबंधित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।


साबिना यास्मिन ने कहा, “न्याय केवल अदालत की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। आम नागरिकों को सरल, सुलभ और समय पर न्याय उपलब्ध कराना विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। लोक अदालत इसी उद्देश्य को वास्तविक रूप देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।”


उन्होंने आम जनता से भविष्य में आयोजित होने वाली लोक अदालतों का लाभ उठाने तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उपलब्ध कराई जा रही निःशुल्क विधिक सेवाओं का उपयोग करने का आह्वान किया।


लखीमपुर में राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान बड़ी संख्या में मामलों के निपटारे ने यह संदेश दिया कि आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से विवादों का समाधान न केवल संभव है, बल्कि यह समय और संसाधनों की बचत करते हुए न्याय तक पहुंच का प्रभावी रास्ता भी बन सकता है।

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