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अभामामस ने नेत्रदान व देहदान पर जागरूकता अभियान चलाया

 


गुवाहाटी, अखिल भारतीय मारवाड़ी महिला सम्मेलन की उत्तर गुवाहाटी शाखा द्वारा राष्ट्रीय प्रकल्प ‘नेत्रदान-देहदान’ के अंतर्गत नेत्रदान को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने का अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत शाखा की ओर से 100 नेत्रदान शपथ पत्र तैयार करवाए गए हैं, जिन्हें समाज के विभिन्न वर्गों, मित्रों एवं समाजबंधुओं के बीच वितरित कर लोगों को मरणोपरांत नेत्रदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है।


शाखा अध्यक्ष इंदु पारीक ने बताया कि अभियान के अंतर्गत अब तक 38 शपथ पत्र वितरित किए जा चुके हैं। कार्ड वितरण के दौरान लोगों को नेत्रदान का संकल्प दिलाने के साथ ही उन्हें इसके महत्व की जानकारी भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि यह अभियान किसी एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे निरंतर जारी रखते हुए अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित किया जाएगा।


उन्होंने बताया कि शपथ पत्र पर अपनी फोटो लगाकर उसे हमेशा अपने पर्स में रखने और परिवार के सदस्यों को भी अपने नेत्रदान के संकल्प की जानकारी देने के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि व्यक्ति के निधन के बाद परिवारजन समय पर उसके संकल्प से अवगत रहें और नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग कर सकें। उन्होंने बताया कि मृत्यु के बाद निर्धारित समय-सीमा के भीतर नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक होता है।


शाखा द्वारा ‘आपकी एक पहल, किसी के जीवन को रोशन करे’ संदेश के साथ चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य नेत्रदान को लेकर समाज में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करना और अधिक से अधिक लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए आगे लाना है।


श्रीमती पारीक ने कहा कि आज भी देश में नेत्रदान को लेकर जागरूकता का अभाव है। अनेक लोगों के मन में यह भ्रांति रहती है कि नेत्रदान करने से अगले जन्म में नेत्र प्राप्त नहीं होंगे। उन्होंने ऐसी मान्यताओं को निराधार बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और शास्त्रों में दान को सदैव महान पुण्य कार्य माना गया है। दान करने से किसी का जीवन कम नहीं होता, बल्कि दूसरों के जीवन में नई आशा और प्रकाश आता है।


उन्होंने कहा कि महर्षि दधीचि भारतीय संस्कृति में त्याग और दान के सर्वोच्च उदाहरणों में से एक हैं, जिन्होंने देवताओं की रक्षा के लिए अपनी अस्थियों तक का दान कर दिया था। जब हमारे संस्कार हमें इतना बड़ा त्याग करने की प्रेरणा देते हैं, तो मरणोपरांत नेत्रदान का संकल्प लेकर किसी दृष्टिहीन व्यक्ति के जीवन में उजाला लाना भी समाज के प्रति हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हो सकती है।


उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे स्वयं नेत्रदान का संकल्प लें और अपने परिवार, मित्रों तथा परिचितों को भी इसके लिए प्रेरित करें। मरणोपरांत भी किसी और की आंखों की रोशनी बनकर इस खूबसूरत दुनिया को देखने का अवसर देने से बड़ा मानवीय योगदान और क्या हो सकता है। शाखा ने आने वाले दिनों में भी इस अभियान को व्यापक स्तर पर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।

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