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कलाक्षेत्र में महा मिलनर तीर्थ के साथ मनाई गई डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी



गुवाहाटी, श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में भारत रत्न सुधाकंठ डॉ. भूपेन हजारिका की जन्म शताब्दी के अवसर पर श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र समाज, भूपेन हजारिका सांस्कृतिक न्यास और सांस्कृतिक मामलों के विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महा मिलनर तीर्थ नाम से दिनभर के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे सुधाकंठ की स्मृति में तैयार की गई वेदी पर स्थापित उनकी प्रतिमा के समक्ष श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका शुभारंभ कलाक्षेत्र समाज के उपाध्यक्ष प्रांजल सैकिया, सचिव सुदर्शन ठाकुर, न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप पुजारी, सचिव मंजुला हजारिका और सांस्कृतिक कर्मी गोपाल जालान ने मान्यता बोरा और जयीता चेतिया के साथ किया। इसके उपरांत अनगिनत प्रशंसकों, जनजातीय सांस्कृतिक दलों और छात्र-छात्राओं ने एक विशाल मानव-श्रृंखला बनाकर सुधाकंठ को नमन किया तथा सामूहिक रूप से मानुहे मानुहोर बाबे गीत का गायन करते हुए रंगघर प्रांगण की ओर प्रस्थान किया। ​तत्पश्चात नगालैंड के अभिनो कचो सहित असम के 15 प्रतिष्ठित चित्रकारों ने सुधाकंठ के कालजयी गीतों पर आधारित तुलिकात भूपेनदा नामक लाइव पेंटिंग कार्यक्रम में भाग लिया। रंगघर प्रांगण में आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम में पद्म विभूषण नृत्याचार्य जतीन गोस्वामी ने मुख्य ध्वजारोहण किया, जबकि अन्य ध्वज वरिष्ठ संगीतकार रमेन चौधरी, प्रख्यात गीतकार कीर्ति कमल भुयान, मूर्तिकार बीरेन सिंह और प्रांजल सैकिया द्वारा फहराए गए। इस दौरान कलाक्षेत्र समाज के पदाधिकारियों और न्यास के सदस्यों ने नतुल नतुल साह गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर असम के मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियों, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित नागरिकों, विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों और छात्रों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। ​ध्वजारोहण के उपरांत रंगघर प्रांगण में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में लोकप्रिय गायकों ने भूपेन दा के अमर गीत प्रस्तुत किए, वहीं बोडो, कार्बी, चाय जनजाति, हजॉन्ग, टाई अहोम और बिष्णुप्रिया मणिपुरी जैसे जनजातीय कलाकार दलों ने पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां दीं। समारोह के दौरान उपस्थित विशिष्ट अतिथियों के व्यक्तिगत विचारों को आपकी दृष्टि में सुधाकंठ शीर्षक के तहत हस्ताक्षर सहित संरक्षित करने का अनूठा प्रयास भी किया गया। दिनभर चले इस आयोजन के समापन सत्र में शाम 5.30 बजे नगालैंड विश्वविद्यालय के कुलाधिपति समुद्रगुप्त कश्यप ने चित्रकारों द्वारा दिनभर में तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

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