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महज 1 साल 8 महीने की उम्र में कामाक्षी ने रचा इतिहास



अंग्रेजी और हिंदी वर्णमाला शब्दों सहित सुनाकर बनाया रिकॉर्ड, असम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की राज्य स्तरीय रिकॉर्ड श्रेणी में नाम दर्ज


गुवाहाटी। उम्र भले ही छोटी हो, लेकिन प्रतिभा और सीखने की क्षमता बड़ी हो तो उपलब्धियां भी असाधारण बन जाती हैं। गुवाहाटी की महज 1 वर्ष, 8 महीने और 24 दिन की नन्ही कामाक्षी भारद्वाज ने अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता से ऐसा ही उदाहरण प्रस्तुत किया है। कामाक्षी ने अंग्रेजी और हिंदी की वर्णमाला को संबंधित शब्दों सहित सुनाकर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसके लिए उनका नाम असम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स (ABR) की राज्य स्तरीय रिकॉर्ड श्रेणी में दर्ज किया गया है।


कामाक्षी की इस उपलब्धि को इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इतनी कम उम्र में बच्चों के लिए अक्षरों की पहचान और उन्हें याद रखना ही चुनौतीपूर्ण होता है, जबकि कामाक्षी ने न केवल अंग्रेजी के A से Z तक अक्षरों को क्रमवार सुनाया, बल्कि प्रत्येक अक्षर से जुड़े शब्द भी बताए। इसके साथ ही उन्होंने हिंदी की स्वरमाला और व्यंजनमाला को भी संबंधित शब्दों सहित प्रस्तुत किया।


11 अगस्त 2026 को आयोजित रिकॉर्ड प्रस्तुति के दौरान कामाक्षी ने महज पांच मिनट में अंग्रेजी वर्णमाला A से Z तक शब्दों सहित सुनाई। इसके बाद उन्होंने हिंदी की संपूर्ण स्वरमाला और व्यंजनमाला का भी शब्दों सहित उच्चारण किया। उनकी इस प्रस्तुति ने उनकी उम्र के अनुरूप असाधारण स्मरण शक्ति और सीखने की क्षमता को सामने रखा।


कामाक्षी की प्रतिभा केवल वर्णमाला तक सीमित नहीं है। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों से संबंधित कुल 137 वस्तुओं और चीजों की पहचान कर अपनी याददाश्त और अवलोकन क्षमता का परिचय दिया। कम उम्र में अलग-अलग वस्तुओं को पहचानना, उनके नाम याद रखना और पूछे जाने पर सही ढंग से बताना उनके सीखने की तेज क्षमता को दर्शाता है।


कामाक्षी गुवाहाटी निवासी ज्योति शर्मा और वेदांत भारद्वाज की पुत्री हैं। उनके दादा श्यामसुंदर शर्मा और दादी सरिता शर्मा हैं। नन्ही कामाक्षी की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी और गर्व का माहौल है। परिजनों का कहना है कि कामाक्षी ने कम उम्र से ही अक्षरों, शब्दों और विभिन्न वस्तुओं को सीखने में विशेष रुचि दिखाई। परिवार ने उसके सीखने की रुचि को प्रोत्साहित किया और नियमित अभ्यास के माध्यम से उसकी प्रतिभा को आगे बढ़ाया।


कामाक्षी की इस उल्लेखनीय प्रतिभा को असम बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने मान्यता प्रदान करते हुए उनका नाम राज्य स्तरीय रिकॉर्ड श्रेणी में दर्ज किया है। रिकॉर्ड में स्थान मिलने के बाद परिवार और शुभचिंतकों ने कामाक्षी को बधाई दी और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।


कामाक्षी की यह उपलब्धि इस बात का उदाहरण है कि बच्चों में सीखने की क्षमता को सही दिशा, प्रोत्साहन और सकारात्मक वातावरण मिले तो वे बेहद कम उम्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। हालांकि इतनी कम उम्र में किसी उपलब्धि का वास्तविक महत्व केवल रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा और सीखने की क्षमता को पहचानने तथा उसे प्रोत्साहित करने का संदेश भी देती है।


नन्ही कामाक्षी भारद्वाज ने अपनी उपलब्धि से न केवल अपने माता-पिता और दादा-दादी को गौरवान्वित किया है, बल्कि गुवाहाटी और असम का नाम भी गौरवान्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि निश्चित रूप से अन्य अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है कि बच्चों पर दबाव डालने के बजाय उनकी रुचियों को पहचानकर उन्हें सीखने का आनंददायक और सकारात्मक वातावरण दिया जाए।

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