असम के महान संगीतकार और भारत रत्न से सम्मानित डॉ. भूपेन हजारिका का फिल्म जगत से जुड़ाव बचपन से ही शुरू हो गया था। 1935 में जब असमिया सिनेमा की पहली फिल्म ‘जयमती’ बन रही थी, तब वे महज़ छठी कक्षा में पढ़ते थे। उस समय उनकी उम्र केवल 9-10 वर्ष थी। कोलकाता जाकर उन्होंने इस फिल्म के लिए गीत रिकॉर्ड किया, जो उनका पहला स्टूडियो अनुभव था। इसके बाद 1939 में उन्होंने असमिया सिनेमा की दूसरी फिल्म ‘इंद्रमालती’ में बारह वर्ष की आयु में बैकग्राउंड सिंगर के रूप में काम किया और ‘बिश्व बिजॉय नव जुवान’ जैसे गीत गाए।





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