रिपोर्ट: बिजू तुनवाल, टियोक
टियोक। असम राज्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका संघ की जोरहाट जिला समिति ने शुक्रवार को सिपाही खोला में प्रेस वार्ता आयोजित कर आंगनबाड़ी कर्मियों की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर केंद्र एवं राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
संघ ने बताया कि 2 अक्टूबर 1975 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर देश में समन्वित बाल विकास सेवा (ICDS) योजना की शुरुआत हुई थी। संघ के अनुसार, देश में मात्र 33 परियोजनाओं से शुरू हुई यह योजना वर्तमान में लगभग 7,075 परियोजनाओं तक पहुंच चुकी है। देशभर के करीब 14 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में लगभग 28 लाख कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं सेवाएं दे रही हैं।
संघ के अनुसार, सरकारी आंकड़ों में असम में 62,110 आंगनबाड़ी केंद्र बताए गए हैं, जबकि संगठन का दावा है कि वास्तविक रूप से लगभग 27,000 केंद्र ही संचालित हो रहे हैं। राज्य में करीब 1.20 लाख कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं कार्यरत हैं।
जिला समिति ने कहा कि 51 वर्ष बीत जाने के बावजूद आंगनबाड़ी व्यवस्था से जुड़ी कई मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। संघ के अनुसार, ICDS का नाम बदलकर ‘सक्षम आंगनबाड़ी एवं पीएम पोषण योजना 2.0’ किए जाने के बावजूद कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं पर काम का बोझ कम होने के बजाय बढ़ा है। पोषण अभियान के नाम पर भी अतिरिक्त कार्यभार दिए जाने का आरोप संघ ने लगाया।
प्रेस वार्ता में संघ ने आंगनबाड़ी केंद्रों में उपलब्ध कराए जाने वाले पोषण आहार की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। संगठन के अनुसार, महिलाओं एवं बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए उपलब्ध कराया जाने वाला खाद्य पदार्थ अपेक्षित स्तर का नहीं है। लगभग 60 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों को मिलने वाली मकान किराया राशि भी बेहद कम है। कई केंद्रों में शुद्ध पेयजल और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव का भी संघ ने उल्लेख किया।
संघ ने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को उनके श्रम के अनुरूप पर्याप्त मानदेय नहीं मिल रहा है। 51 वर्ष बीतने के बावजूद उन्हें नियमित सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है। इसके अलावा सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ, सरकारी चिकित्सा सहायता तथा कार्य के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने की स्थिति में परिवार को उचित मुआवजा देने की व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही गई।
इन समस्याओं के समाधान और केंद्रीय बजट में आंगनबाड़ी योजना के लिए पर्याप्त राशि बढ़ाने की मांग को लेकर संघ ने 1 दिसंबर 2026 से नई दिल्ली में दिन-रात धरना-प्रदर्शन करने की घोषणा की है। संगठन ने असम की प्रत्येक परियोजना से प्रतिनिधिमूलक रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।





कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें