रिपोर्ट: बिजू कुमार तुनवाल
टियोक। टियोक स्थित कामाख्या हार्डवेयर स्टोर परिसर में गुरुवार की रात ‘एक शाम श्री श्याम और हनुमान के नाम’ भजन संध्या एवं श्री श्याम संकीर्तन का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। भक्ति संगीत से सजे इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्याम प्रेमियों एवं श्रद्धालुओं ने भाग लेकर बाबा श्याम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।
कार्यक्रम का शुभारंभ रात करीब 9:11 बजे कमाख्या लाल चांडक द्वारा बाबा श्याम की ज्योत प्रज्वलित कर किया गया। ज्योत प्रज्वलित होते ही पूरा परिसर ‘हारे के सहारे की जय, बाबा श्याम की जय!’ के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं ने कतारबद्ध होकर बाबा की ज्योत ग्रहण की और शीश नवाकर आशीर्वाद लिया। इसी भक्तिमय वातावरण में कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।
इसके बाद आमंत्रित भजन गायक अनिल शर्मा ने एक से बढ़कर एक भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उनके भजनों पर श्याम प्रेमी झूमते हुए बाबा श्याम को पुकारते नजर आए। भक्ति संगीत और जयकारों से पूरा वातावरण श्याममय हो गया।
कार्यक्रम का विशेष आकर्षण स्थानीय नन्हे कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। श्याम सुंदर चांडक सहित अन्य बाल कलाकारों ने भी अपनी मधुर आवाज में भजन प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। अनुभवी भजन गायक अनिल शर्मा के साथ स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।
इस अवसर पर पुरुषों, महिलाओं और युवाओं सहित सभी आयु वर्ग के श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन का भरपूर आनंद उठाया। महिला एवं पुरुष श्रद्धालु भक्ति में लीन होकर झूमते और नृत्य करते नजर आए। श्रद्धालुओं ने बाबा श्याम की ज्योत के दर्शन कर अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना की।
चांडक परिवार की ओर से कमाख्या लाल चांडक ने आमंत्रित भजन गायक अनिल शर्मा को फूलों, असमिया गमछा एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
भजन संध्या देर रात करीब डेढ़ बजे तक चलती रही। समापन से पूर्व श्री श्याम चालीसा का पाठ किया गया। इसके बाद बाबा श्याम की आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर बाबा श्याम का आशीर्वाद लिया।
चांडक परिवार की ओर से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धा, भक्ति और सामाजिक सौहार्द का सुंदर संगम देखने को मिला। ज्योत प्रज्वलन से लेकर अंतिम आरती तक श्रद्धालुओं की भागीदारी और भजनों की मधुर धुन ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।






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