अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच भारतीय तेल रिफाइनरियां खाड़ी क्षेत्र से कच्चा तेल खरीदने के लिए अपनी रणनीति बदल रही हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत कंपनियां इराकी कच्चा तेल खरीदने के लिए अपने स्तर पर टैंकर किराए पर ले रही हैं। इसका उद्देश्य कम कीमत पर उपलब्ध इराकी तेल का लाभ उठाना है।
इंडियन ऑयल ने अक्टूबर में लोडिंग के लिए इराक से 10 लाख बैरल कच्चा तेल एफओबी यानी ‘फ्री ऑन बोर्ड’ आधार पर खरीदा है। इस सौदे में तेल को आगे ले जाने के लिए जहाज की व्यवस्था खरीदार को करनी होती है। रॉयटर्स के अनुसार, इस सौदे में तेल दुबई मानक कीमत से करीब 23 से 28 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर खरीदा गया।
इंडियन ऑयल ने इसके अलावा अक्टूबर के दूसरे हिस्से में इराक से 20 लाख बैरल बेसरा मीडियम और बेसरा हेवी कच्चा तेल एफओबी आधार पर खरीदने के लिए भी निविदा जारी की थी। 1 अक्टूबर की रॉयटर्स रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने व्यापारी विटोल से अक्टूबर 22 से 31 के बीच लोडिंग के लिए 20 लाख बैरल बेसरा मीडियम तेल भी खरीदा है। यह सौदा दुबई मानक कीमत से 32 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर हुआ।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी इराकी कच्चे तेल की ढुलाई के लिए एक बड़े टैंकर को किराए पर लिया है। अगस्त में रॉयटर्स ने बताया था कि कंपनी ने करीब 20 लाख बैरल इराकी तेल ले जाने के लिए टैंकर किराए पर लिया, जिसकी लागत करीब 2.3 से 2.5 करोड़ डॉलर थी। उस समय इराकी तेल दुबई मानक कीमत से करीब 25 से 30 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर उपलब्ध था।
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही संघर्ष के बाद काफी प्रभावित हुई है। इस वजह से टैंकरों की उपलब्धता सीमित हुई और समुद्री परिवहन की लागत बढ़ी है। इसके बावजूद इराकी कच्चे तेल पर मिलने वाली बड़ी छूट भारतीय रिफाइनरियों को अपने स्तर पर टैंकरों की व्यवस्था करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
भारत के नौवहन महानिदेशालय ने भी खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर कई सलाह जारी की हैं। 5 अगस्त 2026 की आधिकारिक सलाह में खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा और सुरक्षा संबंधी सावधानियों पर जोर दिया गया था।
इस तरह भारतीय रिफाइनरियां सस्ते इराकी कच्चे तेल की उपलब्धता का लाभ उठाने के लिए तेल खरीद और समुद्री परिवहन, दोनों में अपनी भूमिका बढ़ा रही हैं।





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