डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की यात्रा में छिपी है मेहनत और वैज्ञानिक सोच की एक बड़ी कहानी
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को भारत के प्रमुख वैज्ञानिकों और पूर्व राष्ट्रपतियों में गिना जाता है। उनका वैज्ञानिक जीवन भारत के अंतरिक्ष और मिसाइल कार्यक्रमों से जुड़ा रहा। डीआरडीओ के आधिकारिक विवरण के अनुसार, डॉ. कलाम ने इसरो में भारत के स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी परियोजना में परियोजना प्रमुख के रूप में काम किया। एसएलवी-3 के सफल प्रक्षेपण के दौरान रोहिणी उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा में स्थापित किया गया। इसके बाद उन्होंने भारत के मिसाइल विकास कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम की सफलता से जुड़े रहे। इसी कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना गया।
बाद में डॉ. कलाम भारत के राष्ट्रपति बने। डीआरडीओ उन्हें ‘पीपुल्स प्रेसिडेंट’ के रूप में याद करता है। उनका जीवन यह दिखाता है कि वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीकी सोच और सार्वजनिक सेवा एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि एक-दूसरे को मजबूत करने वाले क्षेत्र हो सकते हैं।





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