धुबड़ी: धुबड़ी शहर के जाने माने गौ भक्त एंव समाजसेवक, श्रीकृष्ण गौशाला समिति, गोरीपुर-धुबड़ी के पूर्व सचिव एवं वर्तमान सलाहकार सुरेशजी धनावत का शनिवार को 71 वर्ष की आयु में हृदयाघात के कारण असामयिक निधन हो गया। उनके निधन का समाचार मिलते ही समस्त गौशाला परिवार, गोभक्तों एवं क्षेत्रीय निवासियों में गहरा शोक व्याप्त हो गया है। वे अपने पीछे दो पुत्र अतुल धनावत एवं अमित धनावत, एक पुत्री श्रीमती अभिलाषा अग्रवाल सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। रविवार को धुबड़ी शमशान घाट में सुभचिंतको, रिश्तेदारों गौ भक्तों तथा समाज बंधुओं की उपस्थिति में ज्येष्ठ पुत्र अतुल धनावत द्वारा मुखाग्नि देने के साथ ही वे पंचतत्व में विलीन हो गए।
इसके पहले उनके आवास पर श्री कृष्ण गोशाला, गौरीपुर-धुबड़ी के सदस्य तथा गुड मॉर्निंग क्लब के सदस्यों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सुरेशजी धनावत अंचल की कई प्रमुख धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। करीबन बीस वर्ष पहले धर्मपत्नी स्वर्गीय सावित्री धनावत के परलोकगमन के बाद उन्होंने अपने को गौ सेवा में समर्पित करते हुए लगभग 17 वर्षों तक श्रीकृष्ण गौशाला समिति के माध्यम से गौमाता की निःस्वार्थ, अथक एवं अतुलनीय सेवा की। गौसेवा के प्रति उनका समर्पण और संस्थान के विकास में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। श्रीकृष्ण गौशाला समिति परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए तथा श्रद्धांजलि देते हुए बताया कि इनका जाना एक व्यक्ति का जाना नहीं बल्कि श्रीकृष्ण गौशाला परिवार के एक युग का अंत है।
श्मशान घाट पर पुण्यात्मा को शब्दों के द्वारा श्रद्धांजलि देते हुए श्रीकृष्ण गोशाला समिति के अध्यक्ष श्री सुरेश हरलालका ने कहा कि जीवन का यह अंतिम सत्य है कि हर किसी को एक दिन इस संसार से विदा होना है, लेकिन किसी अपने का इस प्रकार अचानक जल्द चले जाना मन को गहरा आघात पहुँचाता है। गौमाता की सेवा के लिए दिए गए उनके अमूल्य योगदान के लिए गौशाला समिति सदैव उनकी ऋणी रहेगी। गौमाता की सेवा में समर्पित उनका जीवन सभी के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। श्री सुरेश हरलालका ने कहा कि आज की गोशाला का प्रारूप का नब्बे प्रतिशत उन्हें की देन है। उनके द्वारा संजोए सपने को पूरा करने की प्रतिबद्धता भी जताई। अध्यक्ष महोदय ने आगे कहा कि ये बीधी का विधान है कि ठीक चार महीने पहले लगता है निष्ठावान गौसेवक सुरेजी धनावत को आभास हो गया था जिसके कारण गोशाला की पूरी जिम्मेदारी हमारी समिति को सौंपकर चले गए।
समिति,गोभक्तों एवं उपस्थित सभी जनों ने एक मिनट का मोन रखकर परमपिता परमेश्वर एवं गौमाता से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान एवं मोक्ष प्रदान करें तथा शोक-संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति शक्ति प्रदान करें।





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