सोनाराम शर्मा बूढ़ाभकत को ‘सत्रज्योति सम्मान’ और कृष्णपद कलिता को ‘संस्कृति साधना पुरस्कार’ से किया गया सम्मानित
रिपोर्ट: बिजू कुमार तुनवाल
टियोक। जोरहाट जिले के टियोक स्थित मूदैजान कमलाबाड़ी संगीत महाविद्यालय के रजत जयंती समारोह का समापन शनिवार को दिनभर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों के साथ हुआ। समारोह में असम की समृद्ध कला, साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। इस अवसर पर दो विशिष्ट सांस्कृतिक हस्तियों को प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ रजत जयंती आयोजन समिति के अध्यक्ष विद्युत विकास गोगोई द्वारा ध्वजारोहण के साथ हुआ। दोपहर में आयोजित पुरस्कार वितरण एवं सांस्कृतिक समारोह का उद्घाटन टियोक विधानसभा क्षेत्र के विधायक विकास शइकिया ने किया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित चंद्रकमल बेजबरुआ महाविद्यालय, टियोक के असमिया विभाग की अध्यक्ष डॉ. करबी गोगोई ने महाविद्यालय की रजत जयंती के उपलक्ष्य में प्रकाशित मुखपत्रिका ‘मुकुल’ का विमोचन किया।
समारोह का प्रमुख आकर्षण दो विशिष्ट व्यक्तित्वों का सम्मान रहा। असम सरकार से कलाकार एवं साहित्यकार पेंशन प्राप्त करने वाले तथा श्रीश्री कमलाबाड़ी सत्र (पुराना), तिताबर के वरिष्ठ भक्त सोनाराम शर्मा बूढ़ाभकत को ‘सत्रज्योति सम्मान’ प्रदान किया गया। वहीं, असम सरकार से कलाकार पेंशन प्राप्त करने वाले विशिष्ट भाओना निर्देशक एवं अभिनेता कृष्णपद कलिता को ‘संस्कृति साधना पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य दिलीप भुइयां बरबायन के संचालन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कमलाबाड़ी सत्र की शाखा सत्र के वरिष्ठ भक्त उपेन बोरा ने विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां प्रदान कीं। महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने गीत, नृत्य और खोल वादन की प्रस्तुतियों से समारोह को सांस्कृतिक रंगों से भर दिया।
शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत महाविद्यालय की छात्राओं ने ‘श्रीराम विजय’ अंकिया नाट (भाओना) का मंचन किया। इसके बाद छात्र-छात्राओं ने ‘पार्थ पराजय’ नाटक प्रस्तुत किया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से असम की पारंपरिक नाट्य विधाओं और सत्रीय संस्कृति की समृद्ध विरासत को प्रदर्शित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्घाटन मरियानी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रूपज्योति कुर्मी ने किया।
रजत जयंती समारोह के माध्यम से महाविद्यालय की 25 वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा को रेखांकित किया गया। साथ ही, असम की कला, साहित्य, संगीत और पारंपरिक नाट्य विधाओं के संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश दिया गया। विशिष्ट कलाकारों और साहित्यकारों को सम्मानित करने की पहल ने उनकी सांस्कृतिक साधना एवं योगदान को मान्यता देने के साथ नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।



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