मातारानी के जयकारों और ढोल-नगाड़ों से भक्तिमय हुआ पूरा क्षेत्र
रिपोर्ट: सोयल खेतान, रोहा
रोहा। रोहा में मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ पांच दिवसीय शारदीय दुर्गोत्सव का समापन हो गया। बुधवार को प्रतिमा विसर्जन के दौरान मातारानी के जयकारों, नाम-कीर्तन और ढोल-नगाड़ों की गूंज से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। श्रद्धालुओं ने नाचते-गाते और मां के जयकारे लगाते हुए उन्हें भावभीनी विदाई दी।
रोहा नगर के बीचोंबीच स्थित रोहा ज्योति संघ, रोहा पुरानी चारिआली, रोहा रहदै बारोवारी युवा मंच और रोहा बाजार सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति सहित वृहत्तर रोहा और चापरमुख की विभिन्न पूजा समितियों की ओर से भव्य पंडाल बनाए गए थे। इन पंडालों में 16 अक्टूबर को महाषष्ठी पर कलश स्थापना के साथ पांच दिवसीय दुर्गोत्सव का शुभारंभ हुआ था।
उत्सव के अंतिम दिन बुधवार को सुबह पुरोहितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ महिषासुरमर्दिनी और जगज्जननी मां दुर्गा की दशमी की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके साथ ही अपराजिता पूजा और रक्षा कवच के रूप में अपराजिता धारण करने की परंपरा निभाई गई। पूजा-अर्चना के दौरान मां के जयकारों और वैदिक मंत्रों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
अपराह्न तीन बजे विभिन्न पूजा समितियों की ओर से मां की प्रतिमाओं के साथ विसर्जन शोभायात्राएं निकाली गईं। श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों की ताल पर नाचते-गाते नगर भ्रमण करते हुए रोहा के नतुन दलंग स्थित कलंग नदी घाट पहुंचे, जहां धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ प्रतिमाओं का जल विसर्जन किया गया। इसके साथ ही पांच दिवसीय शारदीय दुर्गोत्सव का समापन हुआ।





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