गुवाहाटी: असम पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (PIO) को कथित तौर पर संवेदनशील सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के मामले में एक और व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान 39 वर्षीय रितेश कुमार सिंह के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बिहार के बेगूसराय का रहने वाला बताया गया है।
पुलिस के अनुसार, रितेश कुमार सिंह को गुवाहाटी के सातगांव इलाके में स्थित उसके किराये के मकान से हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इसके बाद उसे मामले में गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई STF पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले की चल रही जांच के दौरान हुई।
इस मामले में STF ने इससे पहले 31 वर्षीय अभिषेक कुमार सिंह को गिरफ्तार किया था। बिहार के पूर्वी चंपारण निवासी अभिषेक को 3 और 4 अक्टूबर की दरम्यानी रात गुवाहाटी के सातगांव थाना क्षेत्र के गांधीनगर इलाके में स्थित किराये के मकान से पकड़ा गया था।
असम पुलिस के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में अभिषेक के एक पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के संपर्क में होने और सुरक्षा बलों से संबंधित संवेदनशील जानकारी कथित तौर पर साझा किए जाने की बात सामने आई थी। उसके पास से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और कुछ दस्तावेज बरामद किए जाने की जानकारी दी गई है।
पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में रितेश कुमार सिंह की भी कथित जासूसी गतिविधियों में संलिप्तता और सुरक्षा बलों से संबंधित संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव तक पहुंचाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि रितेश की भूमिका पहले गिरफ्तार किए गए अभिषेक कुमार सिंह से किस तरह जुड़ी थी और कथित तौर पर किस प्रकार की जानकारी साझा की गई।
असम पुलिस के अनुसार, मामले की शुरुआती जानकारी तेजपुर स्थित गजराज कोर की मिलिट्री इंटेलिजेंस से मिली थी। इसके बाद STF और सोनितपुर पुलिस ने मामले में जानकारी जुटाई और कार्रवाई शुरू की।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा ने भी दो लोगों की गिरफ्तारी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि आरोपियों पर सुरक्षा संबंधी जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचाने का आरोप है। मुख्यमंत्री के अनुसार, शुरुआती जांच में आरोपियों को कथित तौर पर हनी-ट्रैप के जरिए जानकारी साझा करने के लिए प्रभावित किए जाने की बात सामने आई थी। इस पहलू की विस्तृत जांच अभी जारी है।
STF दोनों आरोपियों के कथित संपर्कों, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित गतिविधियां कब से चल रही थीं और क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
पुलिस की ओर से अभी यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित तौर पर पाकिस्तान तक कौन-सी विशिष्ट सैन्य या सुरक्षा संबंधी जानकारी पहुंचाई गई। इसलिए जांच पूरी होने से पहले इस संबंध में किसी अतिरिक्त दावे को तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।





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