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दिवाली की सफाई, वास्तु के साथ: शुरुआत कहां से करें?



दीपों से घर सजाने से पहले उसकी देखभाल के लिए भी थोड़ा समय निकालें। वास्तु के कुछ सरल सूत्र दिवाली की सफाई को एक नई दिशा दे सकते हैं।


दिवाली आने से पहले घरों में एक खास हलचल शुरू हो जाती है। कहीं अलमारियां संवरती हैं, कहीं आंगन धुलता है और कहीं पुराने सामान के बीच यादों का पिटारा खुल जाता है। घर का हर कोना जैसे त्योहार में शामिल होने लगता है। इसी तैयारी के बीच उन छोटी जरूरतों पर भी नजर डालें, जो सालभर टलती रही हैं—अटकता दरवाजा, टूटी चौखट या रास्ते में रखा अतिरिक्त सामान। वास्तु ग्रंथों में घर के प्रवेश और उसकी देखभाल को दिया गया महत्व इस सफाई को अधिक सार्थक बनाने की सीख देता है। शुरुआत वहीं से करें, जहां से हर दिन आप अपने घर लौटते हैं।


स्वागत की तैयारी चौखट से करें


दिवाली पर मुख्य द्वार पर सजा तोरण और रंगोली आने वालों का स्वागत करते हैं। इस बार सजावट से पहले दरवाजे को खोलकर देखिए—क्या वह बिना अटके पूरा खुल रहा है? उसके पीछे रखे जूते, गमले या डिब्बे कहीं प्रवेश में बाधा तो नहीं बन रहे? ‘विश्वकर्मा प्रकाश’ के द्वार-विचार में प्रवेश के अवरोध और दरवाजे की क्षति पर ध्यान दिया गया है। इसी सीख को अपनाते हुए चौखट और पल्लों की मरम्मत कराएं तथा आने-जाने की जगह साफ रखें। जब बुजुर्ग सहजता से भीतर आ सकें और मेहमानों को सामान बचाकर कदम न रखना पड़े, तो स्वागत का अपनापन और बढ़ जाता है।


घर के बीच को सामान का पड़ाव न बनाएं


कई घरों में बीच की जगह पर धीरे-धीरे अतिरिक्त मेज, बक्से या पैकिंग का सामान जमा हो जाता है। ‘विश्वकर्मा प्रकाश’ में घर के मध्य भाग को ब्रह्मस्थान बताते हुए वहां अशुद्ध पात्र, राख और कील जैसी वस्तुएं न रखने का निर्देश है। इस सीख को आज के घर में अपनाने का सरल तरीका है—केंद्रीय हिस्से को साफ रखें और वहां अनावश्यक जमाव न होने दें। सफाई करते समय सामान एक कोने से उठाकर बीच में छोड़ने के बजाय उसी दिन उसका स्थान तय करें।


जो आवाज रोज सुनते हैं, उसे भी सुनिए


दरवाजे की चरमराहट अक्सर इतनी परिचित हो जाती है कि हमारा ध्यान ही नहीं जाता। ग्रंथ में ‘रोते हुए द्वार’ का उल्लेख घर की देखभाल के इस पक्ष की ओर ध्यान खींचता है। इस बार केवल दरवाजा पोंछकर आगे न बढ़ें। कब्जे, कुंडी और पल्लों की जांच करें। जहां जरूरी हो, कारीगर से मरम्मत कराएं। घर की रोजमर्रा की छोटी असुविधा दूर होना भी त्योहार की एक सुखद उपलब्धि हो सकती है।


सजावट से पहले सीलन का कारण खोजें


दीवार के दाग पर नया रंग और दुर्गंध पर खुशबू डाल देना आसान है। लेकिन कुछ दिन बाद परेशानी लौट आती है। ग्रंथ में जल-स्राव और भवन की क्षति का भी उल्लेख मिलता है। इसलिए सफाई में सीलन, रिसाव और खराब लकड़ी दिखे, तो उसे मरम्मत की सूची में लिखें। टपकते नल या पानी के निशान को अनदेखा न करें। सफाई वह अवसर है, जब घर अपनी जरूरतें हमारे सामने रखता है; उन्हें पहचानना भी उसकी देखभाल है।


यादों को सहेजें, हर वस्तु को नहीं


सफाई का अर्थ प्रिय चीजों से नाता तोड़ना नहीं है। तस्वीरों, पत्रों और पारिवारिक निशानियों के लिए सम्मानपूर्वक जगह बनाएं। लेकिन जो वस्तु उपयोग में नहीं आती और किसी दूसरे के काम आ सकती है, उसे अच्छे मन से आगे बढ़ाएं। परिवार के साथ यह निर्णय लेने से सफाई बोझ के बजाय साथ बिताया समय बन सकती है।


दिवाली की शाम जब पहला दीपक जलाएं, तो एक बार घर को फिर देखिए। खुला रास्ता, सुधरा दरवाजा और साफ मध्य भाग आपके प्रयास की पहचान होंगे। इस बार सफाई पूरी होने की खुशी के साथ यह संतोष भी हो कि आपने अपने घर की कुछ अनकही जरूरतों का ध्यान रखा है।


रिपोर्ट: देवकी नंदन देवड़ा 

मो. 9377607101


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