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जयपुर में असम की महिला से कथित दुर्व्यवहार पर राज चौधरी ने उठाई आवाज, राजस्थान में पूर्वोत्तर के लिए अलग पुलिस प्रकोष्ठ की मांग

 


मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भेजा ज्ञापन, पीड़िता को सुरक्षा, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील; विशेष हेल्पलाइन बनाने का भी प्रस्ताव


जयपुर/गुवाहाटी: जयपुर में असम की महिला रश्मि शिखा शर्मा के साथ कथित नस्लीय दुर्व्यवहार, यौन उत्पीड़न और मारपीट की घटना को लेकर अब सामाजिक संगठनों ने भी आवाज बुलंद करनी शुरू कर दी है। पूर्वोत्तर प्रादेशीय मारवाड़ी युवा मंच के प्रांतीय अध्यक्ष राज चौधरी ने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को ज्ञापन भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की है। संगठन ने इस घटना को गंभीर बताते हुए राजस्थान में पूर्वोत्तर भारत के नागरिकों की सुरक्षा के लिए अलग पुलिस प्रकोष्ठ और विशेष हेल्पलाइन स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा है।


1 नवंबर को जारी ज्ञापन में राज चौधरी ने 31 अक्टूबर को जयपुर में हुई कथित घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की है। ज्ञापन के अनुसार, असम की रहने वाली रश्मि शिखा शर्मा अपने पति पंकज शर्मा और तीन वर्षीय बेटे के साथ जयपुर में रह रही हैं। आरोप है कि 31 अक्टूबर को अपार्टमेंट की छत पर कपड़े सुखाने के दौरान वहां रहने वाले अभिनव जैन ने उनके प्रति अशोभनीय और यौन प्रकृति की टिप्पणियां कीं। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर रश्मि को उनकी पूर्वोत्तर पहचान को लेकर अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।


ज्ञापन में अभिनव जैन और उनकी पत्नी सोमा जैन पर लिफ्ट के भीतर रश्मि के साथ मारपीट करने और उनका गला दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। साथ ही पीड़िता को निर्वस्त्र घुमाने तथा उनके तीन वर्षीय बच्चे सहित उन्हें छत से नीचे फेंकने की धमकी दिए जाने का भी उल्लेख है। संगठन के अनुसार, घटना के समय उनका छोटा बच्चा भी मौजूद था। ज्ञापन में दावा किया गया है कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हुई है और इस संबंध में बिंदायका पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।


मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में राज चौधरी ने मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की निगरानी में कराने की मांग की है। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित कर उनकी जांच करने तथा मामले में लागू कानूनी प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है। ज्ञापन में पीड़िता, उनके बच्चे और परिवार को पर्याप्त सुरक्षा देने तथा शिकायत वापस लेने के लिए किसी भी तरह का दबाव या धमकी नहीं पड़ने देने की मांग भी शामिल है।


हालांकि, इस ज्ञापन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू राजस्थान में पूर्वोत्तर भारत के लोगों के लिए एक समर्पित पुलिस प्रकोष्ठ स्थापित करने की मांग है। राज चौधरी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राजस्थान पुलिस में पूर्वोत्तर प्रकोष्ठ बनाया जाए, जिसके लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त हो और विशेष हेल्पलाइन भी शुरू की जाए। उनका कहना है कि राजस्थान में शिक्षा, रोजगार, व्यवसाय और अन्य कारणों से रह रहे पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों, पेशेवरों और परिवारों को नस्लीय भेदभाव, उत्पीड़न अथवा किसी अन्य परेशानी की स्थिति में तत्काल सहायता मिलनी चाहिए।


ज्ञापन में दिल्ली और अन्य राज्यों में पूर्वोत्तर के नागरिकों के लिए स्थापित विशेष इकाइयों और हेल्पलाइन की तर्ज पर राजस्थान में भी ऐसी व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया है। संगठन का मानना है कि इससे शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के साथ पुलिस और आम नागरिकों के बीच पूर्वोत्तर की संस्कृति, पहचान और सामाजिक विविधता को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा सकेगी।


राज चौधरी ने ज्ञापन में पूर्वोत्तर भारत और मारवाड़ी समुदाय के पीढ़ियों पुराने सामाजिक संबंधों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के लोगों ने हमेशा मारवाड़ी समुदाय को प्रेम, सम्मान और सुरक्षा दी है। ऐसे में असम की एक महिला के साथ राजस्थान में इस तरह की कथित घटना बेहद पीड़ादायक है। ऐसी घटनाएं केवल पीड़ित परिवार को ही प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच बने आपसी विश्वास और सामाजिक सद्भाव को भी चोट पहुंचाती हैं।


इस ज्ञापन की प्रतिलिपि राजस्थान के पुलिस महानिदेशक, जयपुर पुलिस आयुक्त, जयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक, राजस्थान फाउंडेशन के आयुक्त, राजस्थान राज्य महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग को भी भेजी गई है। इसके अलावा असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमन्त बिश्व शर्मा को भी ज्ञापन की प्रति प्रेषित की गई है।


राज चौधरी ने मुख्यमंत्री से उम्मीद जताई है कि मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई होगी तथा राजस्थान में रहने वाले पूर्वोत्तर के नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। अब देखना होगा कि इस मांग पर राजस्थान सरकार और पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाते हैं।

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