तीन वर्षीय बच्चे के सामने अभद्र टिप्पणी, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप; असम एसोसिएशन जयपुर ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में असम की रहने वाली एक महिला के साथ कथित रूप से नस्लीय दुर्व्यवहार, यौन उत्पीड़न और शारीरिक मारपीट का मामला सामने आया है। घटना 31 अक्टूबर 2026 को जयपुर में होने का आरोप है। पीड़िता की पहचान रश्मि शिखा शर्मा के रूप में हुई है, जो अपने पति पंकज शर्मा और परिवार के साथ पिछले आठ महीनों से जयपुर में रह रही हैं।
असम एसोसिएशन जयपुर की ओर से जारी बयान के अनुसार, घटना उस समय हुई जब रश्मि अपार्टमेंट की छत पर कपड़े सुखाने गई थीं। आरोप है कि इसी दौरान वहां रहने वाले अभिनव जैन ने उनके प्रति अशोभनीय और यौन प्रकृति की टिप्पणियां कीं। रश्मि द्वारा इसका विरोध किए जाने पर विवाद बढ़ गया और कथित तौर पर अभिनव जैन तथा उनकी पत्नी सोमा जैन ने उनके साथ दुर्व्यवहार, नस्लीय टिप्पणी और मारपीट की।
शिकायत के अनुसार, पीड़िता को पूर्वोत्तर भारत की पहचान के आधार पर अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। आरोप है कि पूर्वोत्तर की महिलाओं को लेकर बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और उन्हें अपमानित करने की कोशिश की गई।
एसोसिएशन के बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाद के दौरान लिफ्ट में सोमा जैन ने रश्मि का गला दबाने की कोशिश की। वहीं, अभिनव जैन पर उन्हें निर्वस्त्र घुमाने और उनके साथ-साथ उनके तीन वर्षीय बच्चे को छत से नीचे फेंकने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि घटना के दौरान उनका तीन वर्षीय बेटा भी मौके पर मौजूद था।
एसोसिएशन का दावा है कि घटना अपार्टमेंट में लगे सीसीटीवी कैमरों में दर्ज हुई है। इस मामले में जयपुर के बिंदायका पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की जानकारी भी संगठन ने दी है। हालांकि, पुलिस की ओर से मामले के विस्तृत तथ्यों और जांच की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है।
घटना की निंदा करते हुए असम एसोसिएशन जयपुर ने राजस्थान पुलिस और संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कराने की मांग की है। संगठन ने कहा है कि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए और पीड़िता तथा उनके परिवार को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
एसोसिएशन ने रश्मि शिखा शर्मा, उनके पति पंकज शर्मा और परिवार के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर भारत के लोगों के साथ नस्लीय भेदभाव, अपमान और हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। देश के किसी भी हिस्से में रहने वाले नागरिक को उसकी क्षेत्रीय पहचान, भाषा या संस्कृति के आधार पर अपमानित नहीं किया जाना चाहिए।
संगठन ने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में चुप्पी या लापरवाही के बजाय निष्पक्ष जांच और प्रभावी कानूनी कार्रवाई जरूरी है।



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