* गुवाहाटी से संपत मिश्र *
गुवाहाटी - परम पूज्य आचार्य श्री मणिप्रभ सुरेश्वर जी के 46वें दीक्षा दिवस एवम् गणिनीपद विभूषित पूज्य सुलोचना श्री जी के 58वें दीक्षा दिवस की उपलक्ष में संपूर्ण राष्ट्र में जैन श्वेतांबर मंदिर मार्गी संघ के द्वारा जीव दया दिवस के रुप में आज मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य प्रिय स्मिता श्री जी, पूज्य प्रिय लता श्री जी, प्रिया वंदना श्री जी, आदि ठाणा 6 के सानिध्य में गुवाहाटी गौशाला में एक जीव दया कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसके अंतर्गत गायों को गुड़, रोटी, फल, मूल, घास आदि खिलाया गया। सकल जैन समाज की उपस्थिति में डॉक्टर प्रिय लता श्री जी ने कहा कि मानव कल्याण के साथ साथ पशु पक्षियों का कल्याण भी होना जरूरी है। हमारे लिए तो स्वामी वात्सल्य होते ही रहते हैं मगर गौ धार्मिक वासल्य भी आज हो रहा है। गाय के विषय में बोलते हुए उन्होंने कहा कि गाय भारत की संस्कृति में हमारा प्राण कहलाती है गाय है तो हम भी स्वस्थ हैं। बचपन से हम गाय का दूध पीकर ही बड़े हुए हैं। गाय अपने बछड़े के हिस्से का दूध हमें देती है। मगर आज वही गाय देश-विदेश के कत्लखानों में पहुंच रही है। गाय को क़त्ल खाने से बचाने के लिए गौशालाओं का निर्माण जरूरी है| गाय में 108 देवी देवता रहते हैं। इसके गोमूत्र से कैंसर जेसी असाध्य बीमारी भी ठीक हो जाती है। गाय हमारा पशुधन है। इसे राष्ट्रीय पशु घोषित करने की आवश्यकता है। गाय पर्यावरण को संतुलन बनाने में भी सहायक है। ऐसी परोपकारी गाय की नस्ल को क़त्ल खाने से बचाकर जिंदा रखना हमारा कर्तव्य बनता है। प्रति व्यक्ति को अपने घर में एक गाय रखनी चाहिए। कत्ल खाने की ओर ले जाने वाली गायों को खरीद कर अपने घर के आंगन में लानी चाहिए। कार्यक्रम में वर्धमान स्थानकवासी संघ के अध्यक्ष सागरमल लूंकड, साधुमार्गी जैन संघ के श्याम सिपानी में भी अपना वक्तव्य दिया।




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