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संत अखाराम का धाम बना गांव परसनेऊ की पहचान


राजलदेसर- चूरू जिले की रतनगढ तहसील का गांव परसनेऊ, बीकानेर-दिल्ली रेल मार्ग व जयपुर-बीकानेर नेशनल हाइवे ग्यारह पर स्थित है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब चार सौ वर्ष पूर्व देहला जाट ने इस गांव को बसाया था। परस नामक एक बालिका जो भक्ति भाव में रमी रही उसी के नाम पर इस गांव का नाम परसनेऊ रखा गया। गांव की जनसंख्या करीब पांच हजार है। राजपूत व जाट जाति के अलावा अनुसूचित जाति की बड़ी आबादी है। गांव में ब्राह्मण, सुथार, नाई, ढोली आदि सभी जाति के लोग निवास करते है। बणियों का एक भी परिवार नहीं है। अधिकांश ग्रामीण पशु पालन व खेती पर निर्भर है। यहां करीब तीन सौ कृषि कुए है।




गांव में राजकीय आदर्श उच्च माध्यमिक, राजकीय बालिका माध्यमिक स्कूल है। गांव में प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र, ग्रामीण बैंक , बिजली-पानी, सडक़ व रेल सुविधा है। हनुमंत भक्त संत अखाराम महाराज का धाम गांव की पहचान बन गया है। इस क्षेत्र के लोगों की धार्मिक आस्था का केन्द्र है।  इस धाम की स्थापना करीब साढे तीन सौ वर्ष पूर्व संत अखाराम ने हनुमानजी की मूर्ति स्थापित कर की थी। दादाजी के नाम से विख्यात संत का जन्म दधिची कुल में हुआ था। पुजारी किशन ने बताया कि अक्षय भक्त मंडल की ओर से यहां साल में दो विशेष आयोजन होते है। भादवा कृष्ण पक्ष पंचमी को संत का जन्म दिवस पर मेला भरता है। रात्रि में विशाल जागरण का आयोजन किया जाता है। आसोज कृष्ण पक्ष की पंचमी संत के समाधिस्थ दिवस पर विशाल भण्डारा होता है। संत के दो दिवसीय जन्मोत्सव पर ३० - ३१ अगस्त १८ को  विविध धार्मिक आयोजन होगें। 




इन आयोजनों में विभिन्न प्रांतों व दूर-दराज के बड़ी संख्या में दादा भक्त आते है। दादा की ज्योत के दर्शन करते है। धाम में दादाजी के हाथ का चिंपटा, खड़ाऊ व ज्योत दर्शन का विशेष महत्व है। पुजारी दादा भक्तों को चिंमटा व खड़ाऊ से आशीर्वाद देते है। श्रद्धालुओं का मानना है कि दादा की कलवाणी पीने से जहरिले जीव का जहर उतर जाता है तथा तांती बांधने से बीमारी से छुटकारा मिलता है। दादा भक्त कुंदन दाधीच ने बताया कि ऊंचे धोर पर भव्य हनुमानजी के मंदिर के बांई ओर संत का धाम बना हुआ है। दूर दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के आवास के लिए अतिथिगृह व भोजन के लिए भण्डारे की  व्यवस्था है। संत अखाराम का जन्म दधिची कुल में हरजीराम व सुख बाई के घर आंगन में १७ वीं शताब्दी के मध्य हुआ बताया जाता है। बाल्यकाल से ही अखाराम गोधन चराने रोही में जाते थे। जहां संत ने हनुमानजी महाराज की भक्ति की वहां भी संत का मंदिर बना हुआ है। जो डोळी के नाम से जाना जाता है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी ने उन्है वचन सीधी का आशीर्वाद दिया। गांव के ग्रामीण चार्तुमास में खेत जाने से पहले बालाजी-दादाजी धाम में धोक लगाकर नारियल चढाकर जाते है ।


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