गुवाहाटी, 24 सितम्बर - दिगंबर जैन समाज के दस लक्षण पर्व के दस दिन का काफी धार्मिक महत्व रहता है। इन दस दिनों में निराहार रहकर व्रत करना एक बहुत बड़ी तपस्या मानी जाती है। अन्न-जल आदि कुछ भी ग्रहण करना इस समय के दौरान निषेध माना जाता है। ऐसे कठिन तपस्या को अगर 96 वर्ष की महिला नौवीं बार करें तो यह एक दैविक चमत्कार ही माना जाएगा। सिलीगुड़ी के मिलन पट्टी में रहने वाली मोहिनी देवी पांड्या ने 96 वर्ष की उम्र में भी नवीं बार दशलक्षण करके एक आलेख स्थापित कर दिया है। स्वर्गीय मदनलाल पंड्या की धर्मपत्नी मोहनी देवी इस उम्र के पड़ाव मैं भी चुस्त-दुरुस्त दिखाई देती है। गुवाहाटी के रहने वाले प्रमोद बाकलीवाल एलआईसी ने बताया कि मोहिनी देवी मेरी बुआ है और वह इस उम्र मैं भी काफी शांत रहकर धार्मिक कार्यक्रमों में लगी रहती है। हाल ही में वह रक्षाबंधन के उपलक्ष में गुवाहाटी हमारे घर पधारे थी और बड़े प्रेम से हम सब को राखी बांधी थी। इनकी याददाश्त काफी दुरुस्त है। सात्विक और सादा जीवन जीने वाली मोहनी देवी समाज में एक आदर्श स्वरूप है। दशलक्षण पर्व के उपलक्ष में सिलीगुड़ी दिगंबर जैन समाज और सिलीगुड़ी तेरापंथ युवक परिषद द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया।









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