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इच्छाओं का निरोध करना ही तप है : पं. किरण प्रकाश


सुनील कुमार सेठी 

गुवाहाटी -  दिगंबर जैन मंदिर फैंसी बाजार में दशलक्षण धर्म की आराधना अत्यंत श्रद्धा व भक्ति पूर्वक विभिन्न कार्यक्रमों के साथ की जा रही है। सभी कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में समाज के सभी सदस्य एवं महिलाएं तथा युवा भाग ले रहे हैं। प्रातः काल 5:30 बजे से शांतिधारा, नित्य नियम की पूजन के उपरांत मंडल विधान की पूजन पंडित किरण प्रकाश शास्त्री एवं संगीतकार अजीत जैन के सानिध्य में अत्यंत भक्ति भाव पूर्वक से की जा रही है। आज पर्युषण पर्व के सातवें दिन श्रद्धालुओं द्वारा उत्तम तप धर्म की आराधना की गई। अपने सांयकालीन प्रवचन में पंडित किरण प्रकाश जी ने तप धर्म के बारे में विस्तार से बताएं। उनका कहना है कि समस्त रागादि भावों का त्याग कर आत्मलीन हो विकारों पर विजय पाना ही तप है। संयमी प्राणी सच्चा तपस्वी हो सकता है। इसलिए संयम के बाद तक का क्रम है। इच्छाओं के निरोध होने पर ही तप होगा। इच्छाओं के रहते तब होना असंभव है। अपनी बात को स्पष्ट करते हुए किरण प्रकाश जी ने कहा कि विचारों का विरोध कर वीतराग भाव की वृद्धि करना ही तब का मूल प्रयोजन है। प्रवचन के उपरांत प्रश्न मंच का आयोजन किया गया तथा प्रश्नों का सही उत्तर देने वालों को पुरस्कृत किया गया। प्रातः श्री जी की प्रथम शांतिधारा करने का सौभाग्य मिश्रीलाल सुरेश कुमार अमित कुमार बाकलीवाल एवं प्रेमसुख हीरालाल पांड्या को सपरिवार प्राप्त हुआ। मंदिर के नीचे की वेदी में श्री जी की आरती का भव्य कार्यक्रम अति श्रद्धा और भक्ति का आयोजन किया गया। यह जानकारी प्रचार प्रसार विभाग के सुनील कुमार सेठी एवं ओम प्रकाश सेठी द्वारा दिया गया। 


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