किशोर काला
जैनों का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पर्व है - "पर्युषण पर्व"
गुवाहाटी - पर्युषण का एक अर्थ है− कर्मों का नाश करना। कर्मरूपी शत्रुओं का नाश होगा तभी आत्मा अपने स्वरूप में अवस्थित होगी अतः यह पर्युषण−पर्व आत्मा का आत्मा में निवास करने की प्रेरणा देता है। उल्लेखनीय है कि जैन धर्मावलंबियों में यह पर्व सभी पर्वों का राजा माना जाता है। इसे आत्मशोधन का पर्व भी कहा गया है, जिसमें तप कर कर्मों की निर्जरा कर अपनी काया को निर्मल बनाया जा सकता है। पर्युषण पर्व जैन धर्मावलंबियों का आध्यात्मिक त्योहार है। दिगंबर जैन धर्म में यह पर्युषण पर्व आगामी शुक्रवार 14 सितम्बर 2018 से प्रारंभ होने जा रहा है जो 23 सितम्बर 2018 तक चलेगा। यह पर्व दस दिन तक चलता है। अतः इसे दशलक्षण महापर्व भी कहा गया है। इन दस दिनों में सभी जैन धर्मानुरागी महिला-पुरूष अपनी शक्ति अनुसार तप-त्याग की उत्कृष्ट साधना कर अपने कर्मों की निर्जरा करते हैं। श्वेताम्बर संप्रदाय के पर्यूषण 8 दिन चलते है। पर्युषण पर्व के आयोजन की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी है।श्री दिगम्बर जैन पंचायत के अध्यक्ष महावीर जैन व मंत्री वीरेन्द्र सरावगी ने बताया है कि पर्युषण पर्व के सफल आयोजन हेतु विभिन्न समितियों के गठन हो चुका है। इस आशय की जानकारी प्रचार समिति के संयोजक ओमप्रकाश सेठी ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी। इस समिति का सलाहकार कपूरचंद पाटनी को बनाया गया है।
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