सवाई माधोपुर, 24 अक्टूबर। बाघों की अठखेलियों को लेकर विश्व प्रसिद्ध सवाई माधोपुर के रणथम्भौर नेशनल पार्क को जैसे पिछले कुछ समय से ग्रहण सा लग गया है। एक तरफ जहां बाघों के दीदार के लिये कोसों मिल का सफर तय कर रणथम्भौर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों को वन विभाग की बुकिंग विंडो पर आसानी से टिकट नहीं मिल पा रहे है वहीं दुसरी तरफ रणथम्भौर के जंगलों से बाघों के लापता होने का सिलसिला थमनें का नाम नहीं ले रहा। खबरो के मुताबिक नेशनल पार्क में एक के बाद एक बाघ लापता हो रहा है। जिनका कहीं कोई सुराग नही लग पा रहा है। हालात ये है की वन विभाग लापता बाघों की गिनती बतानें से भी परहेज कर रहा है और विभागीय अधिकारी दबी जुबान एक दो बाघों के लापता होने की बात स्वीकार भी कर रहे है। हालांकि अन्य अधिकारी बाघों के रणथम्भौर में होने की बात कह रहे है लेकिन सूत्रों की मानें तो दो बाघों का भी कहीं कोई अता पता नहीं है।
वहीं बाघों के गायब होने की बात वन विभाग के अधिकारी खुलकर नहीं कर रहे है। सुत्रों की मानें तो रणथम्भौर से करीब 4 बाघ गायब हैं जिनकी वन विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से तलाश की जा रही है। रणथम्भौर से बाघों के गायब होना कोई नहीं बात नहीं है पहले भी इसी तरह कई बाघ रणथम्भौर के जंगलों से लापता हो चुके है। जिनपर बाद में वन विभाग द्वारा पर्दा डाल दिया गया। रणथम्भौर वन प्रशासन का बाघों के संरक्षण पर कम बल्कि पर्यटन पर अधिक ध्यान है। यही कारण है की रणथम्भौर से एक के बाद एक टाईगर गायब हो रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दुर नहीं जब रणथम्भौर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों को बाघों का दीदार होना भी संभव नहीं हो पायेगा।








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