शिलांग से सुशील दाधीच
शिलांग, 1 नवम्बर । श्री राजस्थानी विश्राम भवन मे आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के 6 वे दिन कथा वाचक आचार्य संत श्री रामकृपाल त्रिपाठी ने अंतिम दिन कृष्ण और रूक्मिणी विवाह के प्रसंग का वर्णन किया। कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मी से युद्ध जीत लिया और विदर्भ राजकुमारी रूक्मणी जी को द्वारिका में लाकर पाणिग्रहण किया। उस समय द्वारिकापुरी के घर-घर में उत्सव मनाया जा रहा था। वहां के सभी लोगों का यदुपति श्रीकृष्ण के प्रति बहुत अनन्य प्रेम था। सभी नर-नारी मणियों के चमकीले कुंडल धारण किए थे। उन्होंने आनंद से भरकर चित्र-विचित्र वस्त्र पहने दूल्हा और दुलहन को अनेकों भेंट की सामग्रियां उपहार दीं। उस समय द्वारिका की अपूर्व शोभा हो रही थी। द्वार-द्वार पर दूब, खील आदि मंगल की वस्तुएं सजाई गई थी। भगवती लक्ष्मीजी को रुक्मिणी के रूप में साक्षात लक्ष्मीपति भगवान श्रीकृष्ण के साथ देखकर द्वारिकावासी नर-नारियों को परम आनंद हुआ। कथा स्थल पर उपस्थित सभी भक्त भावविभोर हो गये। व्यास जी महाराज ने कथा के दौरान पुछा की बताईये कथा के प्रसंग मे काग के बारे मे क्या बताया था तो किसी ने कुछ नही बताया तब महाराज श्री ने कहा की जब भी किसी सत्तसंग मे जावो तब अपना ध्यान मन केवल उसी स्थान पर रखना चाहिए सभी चिंताओ से मुक्त रहना चाहिए। बाकी सब ठाकुर जी पर छोङ दो वो सब देख लेंगे। देर शाम तक श्रद्धालु कथा का आनंद उठाते रहे। कथा स्थल पुरी तरह भक्तो से भरा रहा जिसमे महिलाओ सहित काफी भक्तो की उपस्थित रही शुक्रवार को कथा का सातवा दिन ओर कार्यक्रम का समापन होगा एवं हवन आदी के बाद शाम सात बजे से स्थानीय श्री राजस्थानी विश्राम भवन मे महाप्रसाद होगा। अतः सभी भक्त जन प्रसाद भी प्राप्त कर सकते है।








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