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नेशनल एक्शन कमेटी ऑफ जीएसटी प्रोफ़ेशनल्स ने असम सहित सभी राज्यों में सौंपा ज्ञापन


गुवाहाटी, 2 नवम्बर । नेशनल एक्शन कमेटी ऑफ जीएसटी प्रोफ़ेशनल्स (NAC) एक राष्ट्रीय-स्तर का संगठन है, जिसका गठन वर्तमान में देश मे लागू नवागत जीएसटी अप्रत्यक्ष कर कानून में समाहित कठिन व अव्यवहारिक प्रावधानों में आवश्यक वांछित संसोधन, जीएसटी पोर्टल की कार्य-प्रणाली एवं इसमें व्याप्त असंख्य कठिनाइयों व समस्याओं एवं संस्थागत सदस्यों के व्यवसायिक हितों की रक्षा व समस्याओं को सरकार व कॉउन्सिल के समक्ष रखकर इनका उचित निराकरण एवं समाधान प्राप्त करना है । संगठन द्वारा कहा गया है की देश मे जीएसटी लागू हुए लगभग 16 माह पूरे हो चुके है, परन्तु कानून में वर्णित प्रावधानो/नियमों में आज भी अनेक विसंगतियां है, पोर्टल जिसके माध्यम से ही जीएसटी में समस्य वैधानिक व व्यवहारिक कार्यो को सम्पादित किया जाना अनिवार्य है कि कार्यक्षमता व क्रियान्वयन पर अनेकों प्रश्नवाचक चिन्ह प्रतिदिन प्रारम्भ से आज तक लगातार अंकित किये जा रहे है ।

इसी सिलसिले में नेशनल एक्शन कमेटी ऑफ जीएसटी प्रोफ़ेशनल्स अपने नैतिक कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वहन करते हुए अपने संस्थागत सदस्यों एवं देश में व्यवसायरत समस्त व्यवसाइयों जिनकी राष्ट्र-निर्माण में कालान्तर से ही सशक्त एवं महत्वपूर्ण भूमिका रही है, को जीएसटी लागू होने के प्रारंभिक चरण से लेकर आज तक आ रही अनेक तकनीकी एवं व्यवहारिक कठिनाइयों व समस्याओं से केंद्र/राज्य सरकार तथा जीएसटी कॉउन्सिल को अवगत कराने हेतु 2 नवम्बर, शुक्रवार को सभी 29 राज्यो एवं केंद्र-शासित प्रदेशों में एक साथ समस्त तहसील, जिला एवं सम्भाग स्तर पर कार्यरत माननीय जिला कलेक्टर, एसडीएम, माननीय आयुक्त राज्य-कर एवं केंद्रीय उत्पाद सीमा शुल्क (केंद्रीय जीएसटी) को लिखित मेमोरेंडम प्रस्तुत किया। इस मेमोरेण्डम के माध्यम से सरकार व कॉउन्सिल से संगठन यह मांग करना चाहती है की उन्हें भी विधान की धारा 35(5) में वर्णित उपबन्धों में शामिल करते हुए प्रमाणन के अधिकार प्रदान करे और अपने स्लोगन एक-राष्ट्र, एक-कर, एक-बाज़ार में उन्हें विधि-व्यवसायियों के हितार्थ सिर्फ़ एक शब्द और जोड़कर इस स्लोगन को एक-देश, एक-कर, एक- बाज़ार, व "एक-कर पेशेवर" करते हुए कानून की हर विधाओं में सभी को स्वतंत्ररूप से कार्य करने हेतु समान अवसर व अधिकार प्रदान करें।

नेशनल एक्शन कमेटी ऑफ जीएसटी प्रोफ़ेशनल्स के असम राज्य के समन्वयक संजय कुमार सुरेका व अमर पॉल द्वारा मिली जानकारी के अनुसार असम सहित सभी राज्यों में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, एसजीएसटी कम्युनिटी, सीजीएसटी कमिश्नर, डीसी को ज्ञापन प्रस्तुत किया गया।

इस ज्ञापन में समाहित समस्याओं के मुख्य बिंदु निम्नानुसार वर्णित है :

देश-सरल,सुगम एवं आसान कर-प्रणाली व इसका सरल क्रियान्वयन की आवश्यता है:
o वर्तमान में देश मे लागू जीएसटी का हम सभी स्वागत करते है, लेकिन इसे लागू किये जाने से पूर्व सरकार द्वारा इसका विश्लेषण कर इसे सरल व सिंपल बताया गया था, वास्तव में ना तो यह कानून सरल है ना ही इसमे समाहित प्रावधान/नियम आदि सरल-सुगम व सहज़ है ।
o 16 माह पूर्ण हो जाने के बाद भी जीएसटी पोर्टल की समस्याएं जैसे-इसका निर्वाध गति से कार्य ना करना, रिटर्न प्रस्तुतिकरण के लिए निर्धारित अंतिम तारीखों में अक्सर अत्यंत ही धीमी गति से कार्य करना या बिल्कुल ही ठप्प से हो जाना अथवा बंद हो जाना, जिससे समस्त व्यवसायी व कर-सलाहकारों का मूल्यवान समय तो खराब होता ही है साथ ही व्यवसायियों को अनावश्यक रूप से बिलम्ब-शुल्क आदि का भुगतान करना पढ़ रहा है।
o व्यवसाय जगत, विधि-व्यवसायी, कर सलाहकार, अधिवक्ताओं के माध्यम से लगातार आ रही पोर्टल व जीएसटी के क्रियान्वयन समबन्धित समस्याओं को दृष्टिगत रखते हुए, अब समय आ गया है कि राज्य व केंद्र-सरकारें तथा कॉउन्सिल इन पर गम्भीर व सकारात्मक विचार करें एवं इनका समाधानकारक हल प्राप्त करने की दिशा में कार्य करें ।

जीएसटी एक जटिलतम कानून है, इसे सरल व सुगम बनाना जरूरी :
o वर्तमान में लागू देश में कालान्तर से आज तक प्रचलित रहे समस्त अप्रत्यक्ष-कर कानूनों की तुलना में कहीं अधिक जटिल एवं क्लिष्ट प्रावधानों से सुसज्जित है । देश की लगभग 60% आवादी छोटे क़स्बों व गावों में निवास करती है जहां शिक्षा के अभाव में इस कानून में समाहित जटिलतम प्रावधानों व पोर्टल के माध्यम से इसके ऑनलाइन क्रियान्वयन की अनिवार्यता के कारण लोगों को कई विषम परिस्थितियों का सामना करना पढ़ रहा है,अर्थात सरकार द्वारा इसे सरल,सुगम व आसान बनाया जाना चाहिए जिससे देश का आम आदमी एवं असंगठित सेक्टर किसी अन्य के हस्तक्षेप के बिना इसे समझ सके व नियमो का सरलतापूर्वक अनुपालन कर सके ।

जीएसटी कई बाधाओं से युक्त अक्षम कर प्रणाली है:
o देश मे जारी व्यापार प्रणाली में करदाताओं व विधि व्यवसायियों को इस अक्षम कर-प्रणाली के चलते जीएसटी कानून में समाहित प्रावधनों व नियमों के अनुपालन करने में दिन-प्रति-दिन अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पढ़ रहा है, इस कर प्रणाली ने सामान्य रूप से ख़ासकर छोटे व्यवसायियों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है, जिसे व्यवसाय जगत के हितार्थ जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है ।

जीएसटी नेटवर्क (GSTN) की समस्या :
o कई अवसरों पर जीएसटीएन सर्वर अत्यंत धीमा है, जिसके कारण जीएसटी कानून के कानूनी व तकनीकी पहलुओं का पालन करना मुश्किल हो गया है ।
o जीएसटी पोर्टल पर कार्य की जटिलता व इसके अपेक्षानुरूप कार्य ना कर पाने के कारण ना चाहते ह3 भी करदाता के पार्ट पर उसे कानूनी उल्लंघन का दोषी माना जाना, बिलम्ब शुल्क के अनावश्यक भुगतान के लिए बाध्य होना पढ़ रहा है ।
o छोटे व्यवसायी व मंझोले उद्योगपतियों को सिस्टम कार्य करने योग्य नही लगता।
o कम सुविधाओं, संसोधनों व रिसेट विकल्प की कमी का मतलब किसी गलती को सुधारने का कोई मौका नही ।
- अर्थात जीएसटी कानून के अनुपालन प्रक्रियाओं में अभी भी मौलिक परिवर्तनों की आवश्यकता है, जिसके तहत सिस्टम के माध्यम से कार्य करना फ़लग्ज़ीबल होकर, इस पर गलतियों के सुधार की अनुमति का अधिकार होना अति आवश्यक है, क्योंकि अधिकतर करदाता डिज़िटल रूप से साक्षर नही होते है और ना ही वे इस तरह के जटिल कानूनी अनुपालन के बारे में सब कुछ जानते है, चूंकि गलतियां करना मानव का स्वभाव है, अतः संविधान में प्रदत्त मौलिक अधिकारों के अनुसरण में गलती सुधार का अवसर प्रदान किया जाना न्यायसंगत होगा ।
o प्रत्येक करदाता के लॉगिन में लॉग/गतिविधि रिपोर्ट होना चाहिए तथा यह दर्शित होना चाहिए कि निर्धारिती ने किस दिन या किस समय क्या कार्य किया, जिससे सम्वन्धित व्यक्ति किसी भी कानूनी अनुपालन के लिए अपने प्रयासों या परीक्षणों को साबित करने में सक्षम होगा ।
o सरकार द्वारा शायद वेबसाइट व पोर्टल की अक्षमता को छिपाने के कारण कानून में प्रावधानित GSTR-2 व GSTR-3 को अनिश्चित काल तक के लिए स्थगित कर दिया गया ।

ऑनलाइन शिकायतों के निवारण की समस्या:
o पोर्टल,रिटर्न या किसी भी कानूनी समस्या के समाधान के लिए करदाता या किसी व्यक्ति विशेष द्वारा जीएसटीएन को दर्ज़ कराई गई समस्याओं का ना तो कोई जबाब मिलता है ना ही इनका कोई उचित निराकरण हो पाता है, अर्थात जीएसटीएन हेल्पलाइन लगभग असहाय है और काल सेंटर जैसे जोकर की भूमिका को पूरा कर रहा है ।
- इनके लिए हम कर संगठन प्रत्येक तालुका, तहसील, जिला व सम्भाग स्तर पर जीएसटीएन रिसेप्शन सेंटर की जायज़ मांग करते है ।

रिफण्ड समय पर प्राप्त नही होना :
o किसी भी व्यवसायी के लिए व्यवसाय में लगाई गई कार्यशील पूंजी उसके लिये एक तरल द्रव्य की भाँति है, अर्थात रिफण्ड प्रकरणों में धनवापसी आवश्यक जांच के बाद तत्काल व्यवसायी को मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जबकि जीएसटी में रिफण्ड मामलों को जांच के नाम पर अनावश्यक रूप से निष्क्रिय बनाया गया है, जिसने देश की अर्थव्यवस्था में धन का प्रवाह धीमा कर दिया है ।
- रिफण्ड देने की न्यूनतम सीमा तय किया जाना आवश्यक है ।
o अंतिम तारीखों में यदि सिस्टम की अक्षमता के कारण किसी करदाता को बिलम्ब शुल्क अदा करना पढ़ा हो, तो आगामी GSTR-3B में उसी आधार पर इसे माफ़ कर दिया जाना चाहिए ।

जीएसटी रिटर्न दाखिल करने में हुई त्रुटि के सुधार का अवसर :
o हम यहां जीएसटी रिटर्न के सरलीकरण की दृढ़ता से मांग करते है साथ ही यदि किन्ही कारणों से पिछले किसी रिटर्न में कोई त्रुटि हो गई है या किन्ही कारणों से पुरानी कोई वापसी शेष देय है तो ऐसी गलतियों को सुधारकर संसोधित रिटर्न प्रस्तुत करने की अनुमति दिया जाना चाहिए ।

कर भुगतान व रिटर्न प्रस्तुत करने की तिथि के बीच भिन्नता हो :
o देय कर के भुगतान की तिथि एवं जीएसटी रिटर्न प्रस्तुत करने की तिथियों में अंतर होना चाहिए ल, अर्थात कर भुगतान व रिटर्न दाखिल करने के बीच समय का अंतर होना चाहिए ।

घोषणाओं में देरी :
o सरकार अथवा कॉउन्सिल द्वारा जारी अधिसूचना के रूप में ट्वीटर, सोशल मीडिया पर घोषणा का तुरन्त पालन किया जाना चाहिए ।

वार्षिक रिटर्न (GSTR-9 व 9A) के प्रस्तुतिकरण के लिए समुचित समय व सुधार का अवसर:
o किसी भी वित्त वर्ष की समाप्ति के पश्चात वार्षिक विवरणी दाखिल करने का कम से कम 9 माह का समय दिया जाना चाहिए तथा वार्षिक विवरणी का प्रारूप जितना सम्भव हो सके सरल, सहज़ व आसान होना चाहिए एवं इसमे की गई गलती के सुधार के लिए एक मौका अवश्य दिया जाना न्यायसंगत होगा ।

वर्ष 2017-18 के वार्षिक रिटर्न के लिए निर्धारित अंतिम तारीख को 31-03-2019 तक बढ़ाया जाना चाहिए:
o जीएसटी अभी पूर्ण रूप से स्थापित नही हो पाया है, धीरे-2 आवश्यक संसोधन उपरांत यह सहजता की और अग्रसर है, लेकिन पोर्टल सम्बन्धित समस्याओं व अभी तक रिटेन प्रारूप GSTR-9 व 9A की पोर्टल पर अनुपलब्धता के कारण वर्ष 2017-18 के प्रस्तूतिकरण की अंतिम तारीख 31-12-2018 का पालन करना तकनीकी व व्यवहारिक कारणों से कठिन प्रतीत हो रहा है ।
- अतः निवेदन है कि कार्य की गुणवत्ता व नियमो के सही अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इसके अंतिम तिथि को 31-07-2019 तक बढाया जाना श्रेयष्कर होगा, जो निश्चित ही सरकार, व्यवसायी व करसलाहाकर के बीच भ्रम की स्थिति निर्मित होने से बचाएगा ।

नेशनल एक्शन कमेटी ऑफ जीएसटी प्रोफ़ेशनल्स (NAC), सरकार व व्यवसायी के बीच समन्वय की एक कड़ी :
o नेशनल एक्शन कमेटी ऑफ जीएसटी प्रोफ़ेशनल्स भारत का एकमात्र ऐसा कर-संगठन जिसमें भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सदस्य(अधिवक्ता व कर-सलाहकार)शामिल है तथा सभी एक साथ मिलकर पूरे देश मे जीएसटी के सफ़ल क्रियान्वयन व राजस्व संग्रहन के लिए कार्यरत होकर राष्ट्र-निर्माण में अपना सार्थक अतुलनीय योगदान प्रदान करने के लिए सरकार के प्रति वचनबद्ध है ।
o NAC का मूलभूत उद्देश्य आमजन को जीएसटी के प्रति जागरूक करना, जीएसटी को लेकर सरकार का समर्थन करना तथा नियमानुसार राजस्व संग्रहण के लिए कार्य कर सरकार व व्यवसाय जगत के बीच एक पुल की तरह सामंजस्य व समन्वय स्थापित करना है ।

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