धुबड़ी में भाजपा के लिए बन सकता है 'हाथी मेरा साथी' - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

धुबड़ी में भाजपा के लिए बन सकता है 'हाथी मेरा साथी'


अगप के लिए अपनी दावेदारी छोड़ने के मुड में भाजपा

ओमप्रकाश तोदी

धुबड़ी। धुबड़ी की लोकसभा सीट पर टिकट को लेकर अटकलें भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस की ओर से धुबड़ी सीट को लेकर बैनर भी बना लिया गया है। इस सीट पर दो से तीन नामों पर प्रदेश स्तर पर चर्चा हो रही है। वहीं भाजपा से दावेदारों के पैनल संबंधित प्रक्रिया अब तक शुरू ही नहीं हुई है। हालांकि खबरें सामने आ रही हैं कि इस बार यहां असम गण परिषद(अगप)अपना उम्मीदवार उतार सकती है। माना जा रहा है कि अगप-भाजपा की नये सिरे से बन रही मित्रता की सूरत में धुबड़ी संसदीय सीट पर भाजपा अपनी दावेदारी छोड़ सकती है। अगप अपना उम्मीदवार यहां उतार सकती है।भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पार्टी का आलाकमान अल्पसंख्यक बहुल धुबड़ी संसदीय क्षेत्र के भारी-भरकम अल्पसंख्यक बहुल मतदाता पैटर्न को देखते और समझते हुए इस सीट पर अगप को सैफ पैसेज देने के मुड में है। सुत्रों की माने तो कल तक तस्वीर साफ हो जाएगी। मालूम हो कि हाल ही में खुद राज्य के प्रभावशाली नेता तथा वित्त मंत्री डॉ हिमंत विश्व शर्मा ने भी अपने एक बयान में धुबड़ी व बरपेटा सीट पर भाजपा की जीत को असंभव व काफी कठिन बताया था। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रंजीत दास ने भी धुबड़ी का दौरा किया था। इस दौरान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने धुबड़ी संसदीय क्षेत्र के जिला अध्यक्षों व चुनाव प्रभारियों के साथ बंद कमरे में मैराथन बैठक भी की। धुबड़ी में दल की सांगठनिक स्थिति के मद्देनजर की गयी बैठक के बाद पत्रकारों द्वारा अगप-भाजपा के गठबंधन से संबंधित पूछे गए एक सवाल को नजरअंदाज करते हुए यह फैसला दिल्ली से होगा की बात प्रदेश अध्यक्ष ने कही। ईधर अन्य एक विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी के अनुसार भले ही कुछ भाजपा नेता कर्मियों ने चुनाव लड़ने के लिए पार्टी से अपने-अपने स्तर पर स्वत:ही टिकट मांगा था। दिलचस्प बात यह भी है कि भाजपा ने इस बार टिकट के लिए आवेदन मांगे ही नहीं थे। यह बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि भाजपा धुबड़ी सीट को लेकर पहले से ही बैक फुट पर रही है। बताते चलें कि धुबड़ी मुस्लिम बहुल क्षेत्र रहा है। यही कारण रहा है कि 1952 से अब तक के हुए 16 लोकसभा चुनावों में इस सीट से लगातार मुस्लिम उम्मीदवार ही जीतता आ रहा है। बता दें कि असम में चल रहे नागरिकता संशोधन बिल पर असम गण परिषद ने कुछ समय पहले भाजपा(एनडीए)से किनारा कर लिया था। तब से ही लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार अगप अकेले अपने दम पर लोकसभा चुनाव लड़ेगी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें