गुवाहाटी। बोडोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल (बीटीसी) के चुनाव में 17 वर्षों की सत्ता गंवाने के बाद बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के अध्यक्ष हग्रामा महिलारी अब भाजपा को सबक सिखाने की तैयारी में जुट गये हैं।
बीटीसी के चुनाव में भाजपा और बीपीएफ अलग-अलग चुनाव लड़ी थीं। चुनाव बाद बीपीएफ 40 सदस्यीय बीटीसी परिषद की 17 सीटें जीतने के बाद भी सत्ता से दूर रह गयी। जबकि भाजपा चुनाव बाद यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) के साथ गठबंधन के तहत परिषद की सत्ता पर काबिज हो गयी। 2021 के विधानसभा चुनाव भाजपा बीटीसी इलाके में यूपीपीएल के साथ मिलकर लड़ने का ऐलान किया है।
बीपीएफ की ओर से भी आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा के साथ गठबंधन नहीं करने का निर्णय लिया गया है। केवल भाजपा ही नहीं बीपीएफ किसी भी राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी के साथ गठबंधन नहीं करेगी। इसके बदले आगामी विधानसभा चुनाव में बीपीएफ क्षेत्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन बनाकर चुनाव लड़ने की योजना पर काम करना शुरू कर दिया है। इस बीच नवगठित असम जातीय परिषद (एजेपी) के साथ गठबंधन को लेकर प्रारंभिक वार्ता भी बीपीएफ ने शुरू किया है।
हग्रामा महिलारी आगामी विधानसभा चुनाव के जरिए राज्य में बनने वाली नई सरकार में किंग मेकर की भूमिका में आने के लिए अपनी रणनीतियों को तैयार करना शुरू किया है। नई रणनीति के तहत राज्य की विधानसभा चुनाव में 126 सीटों में से बीपीएफ बीटीसी के 12 विधानसभा क्षेत्रों के अलावा राज्य की अन्य 26 विधानसभा क्षेत्रों में भी अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा की है। बीपीएफ के महासचिव प्रवीण बोड़ो समेत अन्य नेता भी अभी से इसको लेकर बोलना शुरू कर दिया है।
बीपीएफ के सूत्रों के अनुसार बीटीसी के अलावा गौरीपुर, गोलकगंज, बंगाईगांव, अभयापुरी (उत्तर), सरभोग, भवानीपुर, पटाचारकुची, दुधनै, बोको, छयगांव, गुवाहाटी (पश्चिम), दिसपुर, मोरीगांव, लहरीघाट, रंगिया, ढेकियाजुली, बरखोला, गोहपुर, धेमाजी, जोनाई, गोलाघाट, सरूपत्थार और कार्बी आंग्लांग जिला के 04 विधानसभा क्षेत्रों में बीपीएफ अपने उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है।
उपरोक्त सभी विधानसभा क्षेत्रों में थोड़े बहुत ही सही बोड़ो जन समुदाय के मतदाता निवास करते हैं। इसको देखते हुए ही बीपीएफ चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई है। माना जा रहा है कि बीपीएफ इन सीटों पर चुनाव जीत पाएगी। यह कहना जल्दबाजी होगा लेकिन बोड़ो मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित कर भाजपा को कड़ी चुनौती देने की मुख्य रूप से यह रणनीति है। कारण बीटीसी के गठन के बाद से बोड़ो बहुल इलाके की 12 विधानसभा सीटों पर बीपीएफ एकतरफा जीत हासिल करती रही है और राज्य की सरकार में अपनी भूमिका को साबित करती रही है। हालांकि, इस बार के बीटीसी चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद बीपीएफ अपनी खीझ मिटाने के लिए भाजपा को चुनौती देने की मंशा बनाई है।
माना जा रहा है कि बीटीसी इलाके में इस बार के विधानसभा चुनाव में बीपीएफ को भाजपा से कड़ी टक्कर मिलने वाली है। इलाके में विधानसभा चुनाव में होने वाले नुकसान की खीझ मिटाने के लिए बीटीसी के बाहर की सीटों पर बीपीएफ भाजपा को मात देने की कोशिश में जुट गई है।
इस बार के विधानसभा चुनाव से पूर्व अगर नवगठित असम जातीय परिषद (एजेपी), नवगठित राइजर दल आदि राजनीतिक पार्टियों के साथ बीपीएफ का गठबंधन होता है तो गठबंधन के तहत बीपीएसक को बीटीसी इलाके में इन पार्टियों का समर्थन मिलेगा, बदले में राज्य के अन्य बोड़ो प्रभावित सीटों पर बीपीएफ नयी पार्टियों को अपना समर्थन देगी। अगर ऐसा नहीं होता है तो बीपीएफ बीटीसी की 12 सीटों के अलावा राज्य की अन्य 26 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। (हि.स.)










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